HIGH COURT का फैसला, इलेक्शन कोई एथलेटिक्स का खेल नहीं है, उपविजेता को विजेता घोषित नहीं कर सकते

Updesh Awasthee
विधि संवाददाता, जबलपुर, 23 जनवरी 2026
: सतना जिले की नगर परिषद नागौद के चुनाव में विवाद के बाद प्रस्तुति याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि, इलेक्शन कोई एथलेटिक्स जैसा खेल नहीं होता जिसमें यदि विजेता अयोग्य घोषित हो जाए तो उपविजेता को विजेता घोषित किया जा सके। निर्वाचन शून्य होने का मतलब है चुनाव दोबारा कराया जाएगा।

सतना के लोकल चुनाव, मोहम्मद सोहराब का निर्वाचन शून्य घोषित

मामला साल 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ा है। वार्ड नंबर 13 से मोहम्मद सोहराब चुनाव जीतकर पार्षद बने थे। लेकिन उनकी इस जीत को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार मोहम्मद नफीस ने चुनाव न्यायाधिकरण (Election Tribunal) में चुनौती दी थी। जांच में पाया गया कि सोहराब ने अपने नामांकन फॉर्म और हलफनामे में अपने खिलाफ लंबित अपराधिक मामलों और अपनी आय के संबंध में गलत जानकारी दी थी। इसे 'भ्रष्ट आचरण' (corrupt practice) मानते हुए न्यायाधिकरण ने सोहराब का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था। 

मोहम्मद सोहराब की अपील, मेरे अयोग्य होने से दूसरा योग्य नहीं होता

दिलचस्प बात यह है कि सोहराब ने अपनी अयोग्यता को चुनौती नहीं दी, बल्कि उन्होंने न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें दूसरे नंबर पर रहे (Runner-up) उम्मीदवार मोहम्मद नफीस को विजेता घोषित कर दिया गया था। सोहराब की दलील थी कि लोकतंत्र में यदि कोई उम्मीदवार अयोग्य होता है, तो उसकी जगह दूसरे को सीधे विजेता नहीं बनाया जा सकता, बल्कि वहां दोबारा चुनाव होना चाहिए। 

हाई कोर्ट ने क,हा बात तो सही है

माननीय न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब चुनाव में दो से अधिक उम्मीदवार मैदान में हों (जैसे कि इस मामले में कुल 7 उम्मीदवार थे) तो यह अनुमान लगाना असंभव है कि अगर अयोग्य उम्मीदवार मैदान में न होता, तो जनता किसे वोट देती। 

आरोग्य उम्मीदवार को दिया गया वोट कचरा नहीं होता

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (जैसे प्रकाश खांडरे मामला) का हवाला देते हुए कहा कि 'बहु-कोणीय मुकाबले' (multi-cornered contest) में उपविजेता को विजेता घोषित करने का नियम लागू नहीं होता। कोर्ट ने माना कि मतदाता को यह नहीं पता था कि उम्मीदवार अयोग्य है, इसलिए उनके वोटों को 'फेका हुआ' या 'बेकार' नहीं माना जा सकता। 

हाई कोर्ट का अंतिम फैसला: 
4 महीने में फिर से होंगे चुनाव हाई कोर्ट ने चुनाव न्यायाधिकरण के उस हिस्से को संशोधित कर दिया है जिसमें दूसरे नंबर वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया था। अदालत ने आदेश दिया है कि:
1. नगर परिषद नागौद के वार्ड नंबर 13 की सीट को तत्काल रिक्त घोषित किया जाए।
2. संबंधित अधिकारी इस वार्ड में पार्षद पद के लिए नए सिरे से चुनाव (Fresh Election) आयोजित कराएं।
3. यह चुनावी प्रक्रिया इस आदेश के चार महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए।

इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि:- 
चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। 
लोकतंत्र में जनता का मत ही सर्वोपरि है। 
इलेक्शन को एथलेटिक्स का खेल नहीं है, एक प्रत्याशी के अयोग्य हो जाने से दूसरा प्रत्याशी विजेता घोषित नहीं किया जा सकता।

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