भोपाल, 6 जनवरी 2026: यह सभी के ध्यान देने योग्य समाचार है। Gen Z जिसको डिजिटल जेनरेशन भी कहते हैं, डिजिटल अरेस्ट के बारे में कुछ नहीं जानती। इंदौर जैसे एडवांस शहर से पढ़ने के लिए आई एक लड़की डिजिटल अरेस्ट हो गई। सवाल यह भी है कि क्या अब साइबर क्रिमिनल्स ने Gen Z को टारगेट करना शुरू कर दिया है? क्योंकि आज से पहले तक सामान्य तौर पर रिटायर्ड लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने के मामले प्रकाश में आते थे।
राज्य साइबर सेल इंदौर के सब इंस्पेक्टर ने काउंसलिंग की
कल एक छात्र कोचिंग से निकलकर सीधे राज्य साइबर सेल इंदौर पहुंचा और यहां पर एसआई इतेंद्र सिंह से मिला। उसने सब इंस्पेक्टर को बताया कि उसकी एक दोस्त, जो इंदौर की रहने वाली है और भोपाल में किसी परीक्षा की तैयारी कर रही है, का उसे फोन आया था कि अर्जेंट पैसे चाहिए। वह रो भी रही थी। उसने उसे कहा कि मैं थोड़ी देर में पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करता हूं। उसे शंका हुई और वह सीधे राज्य साइबर सेल पहुंच गया।
तब तक लड़की एक लाख रुपए ट्रांसफर कर चुकी थी
इस पर सब इंस्पेक्टर सिंह ने तुरंत छात्रा से संपर्क किया और उसको बताया कि इस तरह साइबर ठग लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करते हैं। छात्रा ने बताया कि वह एक लाख रुपए दे चुकी है। उसे उसके कागजात का मनी लॉन्ड्रिंग में उपयोग होने की धमकी देकर केस में फंसने की बात कहकर डराया गया है। पुलिस के समझाने पर छात्रा साइबर सेल पहुंची और भोपाल में केस दर्ज करवाया।
ध्यान देने वाली खास बात
इस मामले में ध्यान देने वाली खास बात यह है कि अपराधियों ने एक ऐसी लड़की को अपना शिकार बनाया जिसके बैंक में लाखों रुपए का बैलेंस होने की कोई संभावना नहीं है। बल्कि इस बात की पूरी संभावना है कि उसे टेक्नोलॉजी की जानकारी होगी और यह भी पता होगा कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता। इसके बाद भी उन्होंने लड़की को टारगेट किया और लड़की उनका शिकार बन गई। यह समाचार सवाल उठता है कि, क्या डिजिटल अरेस्ट जैसे खतरनाक मामलों के बारे में Gen Z भी अपडेट नहीं है।
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