इसे कहते हैं भोपाल की पटियाबाजी: डीबी मॉल से RKMP सिर्फ 3 मिनट में और वह भी साइकिल से?

भोपाल, 30 दिसंबर 2025
: भोपाल की पटियाबाजी वर्ल्ड फेमस है। आजकल काफी कम हो गई है लेकिन बंद नहीं हुई है। आज शहर में गजब की पटियाबाजी हुई है। दो भाइयों ने दावा किया है कि उन्होंने डीबी मॉल से रानी कमलापति तक की दूरी साइकिल चलाते हुए सिर्फ 3 मिनट में पूरी कर ली। साल 2025 के आखिरी दिनों की यह पटियाबाजी लोगों को 2026 तक याद रहेगी। 

भोपाल की पटियाबाजी क्या होती है

शोले फिल्म देखी है आपने, उसमें एक किरदार है सूरमा भोपाली। वह लोगों को एक जगह जमा करके "गप" सुनाया करता था। इसी को भोपाल की पटियाबाजी कहते हैं। दरअसल पुराने भोपाल में सामाजिक मेल मिलाप के लिए पटिया (पत्थर की बेंच) लगाई गई थी। यहां लोग बैठकर अपनी पुरानी यादें ताजा किया करते थे। साहित्य में काफी लोकप्रिय है कि लोग अविश्वसनीय दावे किया करते थे। उदाहरण के लिए "मेरे दादा ने गुलेल से शेर मार दिया था।

भोपाल में आज कौन सी पटियाबाजी हो गई

साल 2025 के आखिरी दिनों में दो भोपाली धुरंदरों ने सारे शहर को एक बात बताई है। उनका कहना है कि उन्होंने कल भोपाल मेट्रो की स्पीड का "रियलिटी चेक" किया। इसमें उन्होंने दावा किया है कि, डीबी मॉल से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन तक 2 किलोमीटर का सफर उन्होंने साइकिल से केवल 3 मिनट में पूरा कर लिया जबकि मेट्रो ट्रेन को पहुंचने में 7 मिनट लगे। अपन मेट्रो की स्पीड की बात नहीं करेंगे वह तो गंभीर मसला है लेकिन साइकिल से ट्रैफिक पर करते हुए 3 मिनट में 2 किलोमीटर की दूरी गजब की पटियाबाजी है। 

FACT CHECK-1: साइकिल की अधिकतम स्पीड क्या है?

भारत की शहरों में सड़क पूरी तरह से सूनी भी क्यों ना हो, औसत 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से साइकिल चलाई जा सकती है। नियमित रूप से साइकिल चलाने वाले प्रोफेशनल साइक्लिस्ट्स 40-45 किमी/घंटा तक पहुँच सकते हैं। अपनी कहानी में जो रियलिटी चेक किया है, वह दोनों भाई रोज साइकिल नहीं चलाते, लेकिन फिर भी मान लेते हैं कि वह बहुत तेजी से साइकिल चला रहे थे, तब भी उनकी स्पीड 45 किलोमीटर प्रति घंटा से तेज नहीं हो सकती। 

FACT CHECK-2: सड़क की अधिकतम स्पीड क्या है? 

यहां बात केवल साइकिल की नहीं है बल्कि सड़क की अधिकतम स्पीड भी होती है। डीबी मॉल से लेकर रानी कमलापति स्टेशन तक हैवी ट्रैफिक होता है। मेट्रो ट्रेन से रेस लगाई है इसका मतलब यह ट्रैफिक का टाइम था। सड़क खाली नहीं थी। आप 150 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलने वाली बाइक लेकर इस दूरी को तय कीजिए, आपकी अधिकतम स्पीड 35 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा नहीं मिल पाएगी। क्योंकि सड़क पर हैवी ट्रैफिक है जो आपकी स्पीड को रोकता है। 

FACT CHECK-3: इतनी तेज साइकिल चला दी, इंसान हो या हनुमान

रियलिटी चेक में जो दावा किया गया है उसके अनुसार 2 मिनट में 3 किलोमीटर की दूरी तय की गई। फॉर्मूला- डिस्टेंस/टाइम= स्पीड लगाकर देखते हैं तो 3 किलोमीटर (3000 मीटर) की दूरी 2 मिनट (120 सेकंड) में तय करने का मतलब है। साइकिल 90 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत स्पीड से चल रही थी। इसका मतलब साइकिल की हाई स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रही होगी। क्योंकि पहले पैडल लेने में और आखिरी ब्रेक लगाने में स्पीड कम हुई होगी। 90 किलोमीटर प्रति घंटा का एवरेज बनाने के लिए हाई स्पीड 100 किलोमीटर से ज्यादा होनी चाहिए। 

अब आप खुद इस न्यूज़ और उस न्यूज़ दोनों की लिंक शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर बताइए कि क्या डीबी मॉल से लेकर रानी कमलापति स्टेशन के बीच 90 किलोमीटर प्रति घंटा की एवरेज स्पीड से साइकिल चलाई जा सकती है। क्या ऐसी कोई साइकिल किसी ने बनाई है जो 90 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चल सके। कमेंट कीजिए और 2025 में भोपाल की सबसे बड़ी पटियाबाजी के बारे में सबको बताइए। 

सामान्य ज्ञान: अंत में यह बता देना भी जरूरी होता है कि प्रोफेशनल स्प्रिंट (सड़क पर) टॉप वर्ल्ड क्लास साइक्लिस्ट द्वारा 70-75 किमी/घंटा की स्पीड का रिकॉर्ड है। भोपाली धुरंदरों ने यह रिकॉर्ड तोड़ दिया है तो गिनीज बुक वालों को बुलाना चाहिए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करना चाहिए। दुनिया को पता चलना चाहिए, वर्ल्ड लेवल की साइकिल रेस के लिए दो खिलाड़ी भोपाल में है।
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