GWALIOR NEWS: सड़क का सवाल आते ही प्रभारी मंत्री की सिट्टी-पिट्टी गुम

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 13 दिसंबर 2025
: मोहन यादव सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रदेश भर में मंत्री जनता के सामने सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं, लेकिन ग्वालियर में प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट की प्रेसवार्ता उस समय असहज हो गए जब पत्रकारों ने शहर की जर्जर सड़कों पर सवाल दागने शुरू कर दिए। मंत्री ने सरकार के कामकाज को बेमिसाल बताते हुए घंटे भर योजनाओं की फेहरिस्त पेश की, मगर सड़कों के मुद्दे पर जवाब देते नहीं बने और बार-बार टालमटोल करते नजर आए।

प्रभारी मंत्री ने घंटे भर तक राज्य सरकार के काम बताए

शनिवार को ग्वालियर में आयोजित प्रेसवार्ता में तुलसी सिलावट ने बीजेपी सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है, युवाओं को रोजगार, किसानों को सम्मान और गरीबों तक जनकल्याणकारी योजनाएं पहुंचाई गई हैं। पीएम आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का बखान करते हुए मंत्री ने दावा किया कि अब एक परिवार को 20 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास दिखाने को कुछ नहीं बचा, इसलिए बौखलाहट में प्रदर्शनी लगा रहा है। सिंचाई क्षेत्र में भी सरकार ने रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है।

प्रभारी मंत्री ग्वालियर के गढ्ढों में अटक गए

लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए, माहौल बदल गया। ग्वालियर की बदहाल सड़कों का मुद्दा सबसे आगे आया। पत्रकारों ने पूछा कि बार-बार निरीक्षण और फटकार के बावजूद सड़कें क्यों नहीं सुधर रही हैं। पहले तो मंत्री ने इसे पुराना विषय बताकर उपलब्धियों पर लौटने की कोशिश की, लेकिन जब सवाल दोहराया गया तो सिर्फ इतना कहा कि सड़कें दुरुस्त कराई जा रही हैं। कोई समय सीमा, कोई ठोस योजना, कुछ नहीं।

सिंधिया भी ग्वालियर की सड़कें ठीक नहीं करवा पाए

गौरतलब है कि मानसून के दौरान ग्वालियर के पॉश इलाकों तक की सड़कें धंस गई थीं, गड्ढों ने शहर को छलनी कर दिया था। उस समय प्रभारी मंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक ने अधिकारियों को लताड़ लगाई थी और तत्काल सुधार के निर्देश दिए थे। बरसात गए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं। लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और यही गुस्सा प्रेसवार्ता में पत्रकारों के सवालों के रूप में सामने आया।

मुख्यमंत्री पास, प्रभारी मंत्री फेल

प्रेसवार्ता के अंत में एक बार फिर सड़कों का सवाल उठा तो मंत्री ने दोहराया कि दुरुस्त कराया जाएगा और इसके साथ ही चर्चा समाप्त कर दी। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच स्थानीय मुद्दों पर इस तरह जवाब न दे पाना सरकार के लिए असहज सवाल खड़े कर रहा है। जनता अब देख रही है कि योजनाओं की चमक के पीछे जमीनी हकीकत क्या है।
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