सेंट्रल डेस्क, 30 दिसंबर 2025: हम अक्सर कैलकुलेट करते हैं की धरती कब तक अपने अस्तित्व में रहेगी लेकिन World Weather Attribution की रिपोर्ट बताती है कि, धरती तो अस्तित्व में रहेगी केवल इंसान खत्म हो जाएंगे। यह भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की बात। 2025 में सायरन बज गया है। यदि 2026 में कड़े कानून लागू नहीं किए, इंसानों ने स्वयं पर अनुशासन का पालन नहीं किया तो पृथ्वी पर इंसानों की तबाही शुरू हो जाएगी। यह किसी फिल्म की तरह एक दिन में नहीं होगी, हर साल लाखों लोगों की मौत होगी और करोड़ों लोगों का जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा। खत्म होने में ज्यादा टाइम नहीं लगेगा क्योंकि हम इंसानों की कुल जनसंख्या सिर्फ 826 करोड़ ही तो है।
World Weather Attribution की नई रिपोर्ट
World Weather Attribution की नई रिपोर्ट बताती है कि 2025 में दुनिया भर में extreme weather events अभूतपूर्व रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक यह साल अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो गया है, जबकि इस दौरान La Niña जैसी परिस्थितियां मौजूद थीं जो आम तौर पर तापमान को थोड़ा ठंडा करती हैं। इसके बावजूद धरती का औसत तापमान खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
रिपोर्ट साफ कहती है कि जलवायु परिवर्तन अब किसी अनुमान का विषय नहीं रहा। इसके असर हर महाद्वीप में, हर समाज में और हर अर्थव्यवस्था में दिख रहे हैं, जो हमें चेतावनी दे रहे हैं कि अगर अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां और ज्यादा पीड़ित होंगी।
गर्मी की सिर्फ एक लहर से 24000 लोगों की मौत
इस साल दुनिया भर में 157 बड़े Extreme weather events को दर्ज किया गया। इनमें बाढ़ और heatwaves सबसे ज्यादा रहीं। अकेले यूरोप में एक ही गर्मी की लहर के दौरान करीब 24 हजार लोगों की मौत का अनुमान है। अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में हालात और भी गंभीर रहे, जहां कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था और सीमित संसाधनों ने संकट को और गहरा कर दिया।
रिपोर्ट बताती है कि climate crisis का बोझ असमान रूप से पड़ रहा है। गरीब समुदाय, बुज़ुर्ग, बच्चे और हाशिए पर रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, कई देशों में data की कमी के कारण इन प्रभावों की पूरी तस्वीर सामने भी नहीं आ पाती, जो हमें याद दिलाता है कि यह संकट सिर्फ मौसम का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का भी मुद्दा है।
धरती का तापमान पहली बार 1.5 डिग्री की सीमा पार
वैज्ञानिकों के मुताबिक 2025 में तीन साल का औसत तापमान पहली बार 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर गया है। यह वही सीमा है जिसे Paris Agreement में सुरक्षित भविष्य के लिए अहम माना गया था। यह खबर हमें डराती है लेकिन साथ ही जगा भी रही है कि अभी भी समय है बदलाव लाने का।
World Weather Attribution की सह संस्थापक और Imperial College London की प्रोफेसर Friederike Otto कहती हैं कि:-
अब जलवायु जोखिम काल्पनिक नहीं रहे। Fossil fuels पर निर्भरता लगातार जानें ले रही है, अरबों डॉलर का नुकसान कर रही है और समाजों को भीतर से तोड़ रही है। उनकी ये बातें हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि हमारी रोजमर्रा की आदतें कितनी बड़ी कीमत चुका रही हैं।
सारी दुनिया में आग, बाढ़ और तूफान
2025 में जंगलों की आग, खासकर अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में, पहले से कहीं ज्यादा भयानक रहीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक आग लगने की घटनाएं भले ही इंसानी गतिविधियों से शुरू होती हों, लेकिन उनका इतना व्यापक और विनाशकारी रूप लेना सीधे तौर पर climate change से जुड़ा है।
इसी तरह तूफानों और भारी बारिश ने एशिया और कैरिबियन क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। कई मामलों में जलवायु परिवर्तन ने इन घटनाओं की तीव्रता को कई गुना बढ़ा दिया, जो हमें महसूस कराता है कि प्रकृति अब हमारे खिलाफ हो रही है।
शरीर की सहनशक्ति खत्म हो रही है
रिपोर्ट कहती है कि अगर emissions में तेज़ कटौती नहीं हुई, तो आने वाले साल और भी खतरनाक होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक अब adaptation की भी एक सीमा सामने आ रही है। कुछ जगहों पर लोग अब हालात के साथ खुद को ढाल भी नहीं पा रहे, जो हमें दुखी करता है लेकिन कार्रवाई के लिए प्रेरित भी करता है।
Royal Netherlands Meteorological Institute की वैज्ञानिक Sjoukje Philip कहती हैं कि:-
यह अब सामान्य उतार चढ़ाव नहीं है। धरती एक नई और खतरनाक अवस्था में प्रवेश कर चुकी है, जहां थोड़ी सी गर्मी भी बड़े पैमाने पर तबाही ला सकती है। उनकी ये चेतावनी हमें जगाती है कि वक्त कम है।
2026: आखरी मौका है नहीं तो बहुत देर हो जाएगी
रिपोर्ट साफ कहती है कि fossil fuels से दूर जाना अब विकल्प नहीं बल्कि ज़रूरत है। अगर सरकारें अभी भी ठोस कदम उठाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को सबसे भयावह हालात से बचाया जा सकता है।
World Weather Attribution के वैज्ञानिकों का कहना है कि 2026 और उसके बाद के साल यह तय करेंगे कि दुनिया इस संकट से सीखेगी या उसकी कीमत और ज़्यादा चुकाएगी। यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह एक चेतावनी है, एक पुकार है, कि अगर आज नहीं चेते तो कल बहुत देर हो जाएगी। रिपोर्ट: निशांत सक्सेना।
अन्य संबंधित जानकारी और समाचार
इस रिपोर्ट के अलावा, World Weather Attribution ने 2025 में 22 नए extreme weather events का अध्ययन किया और 6 पुरानी heatwaves को दोबारा देखा। उदाहरण के लिए,
- South Sudan में फरवरी 2025 की heatwave climate change की वजह से 4 डिग्री ज्यादा गर्म हुई, जिससे स्कूल बंद हो गए और बच्चे heatstroke से प्रभावित हुए।
- इसी तरह, Hurricane Melissa ने Jamaica में $8.8 billion का नुकसान किया, जो देश के GDP का 41% है।
- पाकिस्तान में जून से सितंबर तक floods से 1,037 से ज्यादा मौतें हुईं।
- यूरोप में अप्रैल से सितंबर तक heatwaves से 4,723 से 16,500 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। कुछ रिपोर्टर्स में यह आंकड़ा 24000 तक है।
- भारत-पाकिस्तान में अप्रैल से जुलाई तक heatwaves से 455 मौतें हुईं।
ये घटनाएं दिखाती हैं कि climate extremes अब एक नई era में प्रवेश कर चुके हैं, जहां छोटी temperature increase भी बड़े impacts ला रही है।
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