Google का नया AI मॉडल: तकनीक की दुनिया में नई हलचल, क्या हड़प्पा की भाषा भी समझ सकता है?

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 15 नवंबर 2025
: तकनीकी दुनिया में एक नई हलचल मच गई है, जब गूगल के AI Studio में एक अघोषित AI मॉडल का A/B टेस्टिंग सामने आया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल बहुप्रतीक्षित Gemini-3 हो सकता है, जो जटिल कामों में विजुअल एक्यूरेसी और एक्सपर्ट-लेवल रीजनिंग दोनों को एक साथ हैंडल कर रहा है। 

यह डेवलपमेंट AI की दुनिया में एक बड़ा स्टेप लगता है

अमेरिका में एक हिस्टोरियन के अनोखे टेस्ट में इसकी क्षमताओं ने सबको चौंका दिया। न केवल पुराने हैंडरिटन डॉक्यूमेंट्स का लगभग परफेक्ट ट्रांसक्रिप्शन, बल्कि बिना किसी एक्स्ट्रा हेल्प के ह्यूमन-लाइक डीप एनालिसिस भी। हिस्टोरियन का कहना है कि यह डेवलपमेंट AI की दुनिया में एक बड़ा स्टेप लगता है, जो हिस्ट्री से लेकर दूसरे फील्ड्स तक बड़े बदलाव ला सकता है।

AI की ये स्किल्स मौजूदा LLMs से बहुत आगे लगती हैं

इसकी शुरुआत गूगल के वेब-बेस्ड AI Studio से हुई, जहां यूजर्स को कभी-कभी दो ऑप्शन्स दिखाए जाते हैं और बेस्ट चुनने को कहा जाता है। यह A/B टेस्टिंग का तरीका बड़े AI लैब्स द्वारा नए मॉडल लॉन्च से ठीक पहले इस्तेमाल किया जाता है, जिसने Gemini-3 की अफवाहों को बल दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स में यूजर्स ने इस मॉडल की सरप्राइजिंग स्ट्रेंथ का जिक्र किया। सिर्फ एक प्रॉम्प्ट से फुली वर्किंग Windows और Apple OS क्लोन, 3D डिजाइन सॉफ्टवेयर, Nintendo एमुलेटर, और प्रोडक्टिविटी सूट्स को कोड करना। ये स्किल्स मौजूदा Large Language Models (LLMs) से बहुत आगे लगती हैं, जो अक्सर कॉम्प्लेक्स चैलेंजेस के लास्ट स्टेज पर रुक जाती हैं।

खासकर एक हिस्टोरियन ने इस मॉडल को ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्स पर टेस्ट किया, जो उनके अनुसार LLMs की ओवरॉल कैपेबिलिटीज का बेस्ट बेंचमार्क है। ऐसे हैंडराइटिंग को पढ़ना सिर्फ विजुअल टास्क नहीं। इसमें टाइम के साथ चेंज होती लैंग्वेज, अनफैमिलियर वर्ड्स के नए मीनिंग, पुरानी मेजरमेंट सिस्टम्स, और कल्चरल कॉन्टेक्स्ट्स की डीप अंडरस्टैंडिंग की जरूरत पड़ती है। पेलियोग्राफी (Paleography) में विजुअल को रीजनिंग से जोड़ना पड़ता है, जहां अनसर्टेन लेटर्स को नोन पैटर्न्स से कनेक्ट करके लॉजिकल कंक्लूजन्स निकाले जाते हैं। ट्रेडिशनल LLMs इस तरह की रीजनिंग पजल्स में, खासकर अनट्रेन्ड फॉर्मेट्स पर, कमजोर साबित हुए हैं। 

यह न्यूज़ तो बड़ी एक्साइटेड कर रही है लेकिन एक सवाल अभी भी बाकी है। क्या कोई भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम हड़प्पा की भाषा को समझ सकता है। क्या वह कर सकता है जो इंसान नहीं कर पाए।
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