परीक्षा में POWER CUT - हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, स्टूडेंट को न्याय उम्मीद, फैसला सुरक्षित

Updesh Awasthee
मध्य प्रदेश में बिजली कंपनी के लिए POWER CUT मामूली बात है, लेकिन इसी के कारण इंदौर और उज्जैन के काम से कम 75 विद्यार्थियों का फ्यूचर खतरे में पड़ गया। इस समय NEET-UG पास करके उन्हें मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करना चाहिए था, लेकिन हाई कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। NTA भी मदद नहीं कर रही है। उसके लिए स्टूडेंट्स के फ्यूचर से, अपना कंफर्ट ज्यादा जरूरी है। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। विद्वान न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्टूडेंट को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा।

स्टूडेंट्स के वकील की दलील

75 याचिकाकर्ता स्टूडेंट्स की ओर से एडवोकेट मृदुल भटनागर ने कोर्ट में तर्क दिया कि अगर इन स्टूडेंट्स को री-एग्जाम का मौका नहीं मिला, तो उनका भविष्य (future) प्रभावित होगा। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की रिपोर्ट पर सवाल उठाए और कहा कि NTA ने जो दावे किए हैं, वे सही नहीं हैं। उनके मुताबिक, NTA ने परीक्षा के लिए 350 करोड़ रुपये फीस ली, लेकिन कई सेंटर्स पर पावर बैकअप (power backup) की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि सेंटर्स पर फिजिकल वेरिफिकेशन (physical verification) नहीं किया गया।

इसके अलावा, 20 से ज्यादा स्टूडेंट्स, जिन्होंने 3 मई के बाद याचिका दायर की थी, उनकी ओर से एडवोकेट विवेक शरण ने तर्क रखे। उन्होंने मांग की कि इन स्टूडेंट्स की याचिकाओं को भी शामिल किया जाए, क्योंकि उनकी परीक्षा भी बिजली कटौती से प्रभावित हुई थी।

NTA के वकील की दलील

NTA की ओर से भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि NEET-UG परीक्षा में 22 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। सभी सेंटर्स पर उचित व्यवस्था थी, और जहां बिजली गुल होने की शिकायत आई, वहां पावर बैकअप मौजूद था। उन्होंने कहा कि केवल 75 स्टूडेंट्स के लिए री-एग्जाम कराना व्यावहारिक (practical) नहीं है। NTA ने यह भी बताया कि 14 जून को रिजल्ट (result) घोषित हो चुका है और सेंटर्स की सीसीटीवी फुटेज (CCTV footage) सहित सभी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जा चुकी हैं।

हाईकोर्ट ने बिजली बंद करके खुद जांच की थी

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इन 75 स्टूडेंट्स के लिए री-एग्जाम कराने का आदेश दिया था, लेकिन NTA की अपील पर इस आदेश पर स्टे (stay) लगा दिया गया। एक सुनवाई के दौरान जज ने कोर्ट रूम की बिजली बंद कराकर NEET-UG का पेपर पढ़ा था, ताकि स्टूडेंट्स की परेशानी को समझ सकें। कोर्ट ने कहा था कि बिजली कटौती की वजह से स्टूडेंट्स को असुविधा हुई, जबकि उनकी कोई गलती नहीं थी।

मामला क्या है, विवाद क्यों हुआ

4 मई को NEET-UG परीक्षा के दौरान इंदौर और उज्जैन के कई सेंटर्स पर बिजली गुल हो गई थी। स्टूडेंट्स का कहना है कि इससे उनकी परीक्षा पर असर पड़ा। एडवोकेट मृदुल भटनागर ने कोर्ट में बताया कि NTA के एक सेंटर ऑब्जर्वर ने खुद अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कई सेंटर्स पर जनरेटर (generator) नहीं थे और रोशनी (lighting) की कमी थी। उन्होंने उज्जैन के 6 सेंटर्स की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने की मांग भी की।

अब क्या होगा?
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। स्टूडेंट्स को उम्मीद है कि उन्हें री-एग्जाम का मौका मिलेगा, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। दूसरी ओर, NTA का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर री-एग्जाम कराना संभव नहीं है। इस मामले में कोर्ट का अंतिम फैसला जल्द ही आने की उम्मीद है।
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!