CM Sir, युक्तियुक्तकरण के कारण जॉइनिंग के बाद हटा दिए गए अतिथि शिक्षकों का क्या होगा - Khula Khat

Bhopal Samachar
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माननीय मुख्यमंत्री जी, स्कूल शिक्षा मंत्री जी, रोजगार और कल्याण मंत्री जी, यह कैसा अन्याय है जो नित प्रतिदिन नये नये सुरसारूपी और अनियोजित आदेशों के रूप में प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों के साथ हो रहा है। जो नित नये तरीकों से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। क्या प्रदेश सरकार इतनी बेगैरत हो गई है जो जान बूझकर अतिथि शिक्षकों की सहनशीलता की अग्नि परीक्षा ले रही है। 

इतनी जल्दी तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलते

वही अतिथि शिक्षक जो विगत कई वर्षों से शिक्षा विभाग की नींव बना हुआ है, वही अतिथि शिक्षक जिसका शोषण स्कूल के शिक्षक से लेकर आला अधिकारी तक कर रहे हैं और वही अतिथि शिक्षक जो दैनिक मजदूर से भी कम कीमत में अपनी सेवाएं प्रदान करके शिक्षा विभाग की नाक बचाये हुए है। जहाँ एक ओर प्रदेश में बिना कुछ किये धरे करोड़ों महिलाओ को लाडली मानकर हर महीने अरबों रुपये समय से मुफ्त बाँटे जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर लाडलाइयों के लाड़लों का भविष्य सुधारने के काम में लगे अतिथिन से सौतेला व्यवहार कतई न्याय संगत नहीं है। उस पर रोज नये नियम पेंच अलग उलझन पैदा कर रहे हैं। सत्र की शुरुवात में ही अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में कभी पोर्टल तो कभी अन्य दिक्कतों के कारण आज दिनांक तक तारीखे ही बढ़ रही है। जिसके कारण आंदोलन हेतु विवश हुए अतिथि शिक्षकों के प्रतिनिधिमण्डल से मिलने पर कुछ मांगो कों मान लिया गया लेकिन इतनी जल्दी तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलते जितनी जल्दी आलाकमान। 

क्या प्रदेश के मुखिया को अतिथि शिक्षकों पर जरा भी दया नहीं आती

मांगी गई मांगों में से एक मांग थी की किसी अतिथि कों बीच सत्र में बाहर नहीं किया जायेगा, लेकिन कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या। अभी सारी जटिल प्रक्रियाओं और रोज बदलते आदेशों के मकड़जाल से उलझते कुछ अतिथिओ द्वारा ज्वाइन किया ही था कि महज हफ्ते भर कार्य करने के बाद नई समस्या खड़ी हो गई। अव्यवस्थित तरीके से मनमाने ढंग से शिक्षा विभाग कों प्रयोगशाला बनाकर नित नये प्रयोगों कि श्रंखला में अब अतिशेष रूपी प्रयोग किया जा रहा है। जिसने हफ्ते भर पहले ही ज्वाइन किये बेचाररे अतिथि शिक्षकों कों फिर बाहर का रास्ता दिखा दिया हैं। क्या प्रदेश के मुखिया जी कों इन अतिथि और उनके परिवार पर तनिक भी दया नहीं आती जो इस तरह के नित नये प्रयोगो पर चुप हैं। 

अतिथि शिक्षक को ज्वाइन करवरकर 8 दिन बाद हटा दिया

और इन सबका सबसे ज्यादा असर किसी पर हो रहा है तो वह शिक्षा का केंद्र बिंदु माने जाने वाले विद्यार्थी पर हो रहा है। जो सत्र के तीन माह बीत जाने के बाद भी कुछ स्कूलों में तो आज दिनांक तक ना कोई शिक्षक मिला ना किताब खुली। फिर किसके लिए ये लाखों करोड़ों की योजनाए हैं। तत्सबंध में एक उदाहरण स्वरुप जिला दमोह के ब्लॉक हटा के मड़ियादो संकुल के एक स्कूल में विगत 5 वर्षों से कार्यरत अंग्रेजी विषय के अतिथि शिक्षक श्री रामगोपाल कचेरा द्वारा अव्यवस्थित पोर्टल प्रक्रिया के चलते पिछले सप्ताह ही स्कूल ज्वाइन किया था कि पूरे आठ दिन बाद ही उनके स्कूल में अंग्रेजी विषय के लिए एक प्राथमिक शिक्षक श्री सुरेश कुशवाहा जो कि इसी स्कूल से मात्र आधा किलोमीटर दूर स्थित प्राइमरी स्कूल में पदस्थ थे, को उच्च पद प्रभार सौंप दिया गया, लेकिन उस अतिथि का क्या जिसका भविष्य अंधकारमय हो गया। 

तालाब खाली भी होगा और चीटियां मिलकर...

उसकी सुनने बाला कौन और ऐसे प्रदेश में सैकड़ों स्कूलों में हजारों अतिथि शिक्षक हैं जो इस घटिया सिस्टम और अव्यवस्थित नियमो के चक्कर में बेरोजगार होते जा रहे हैं। ऊपर से शिक्षा विभाग के जिम्मेदार मंत्री जी जले पर नमक छिड़क कर वक्तव्य दे रहे रहे है। खैर समय सबका आता है तालाब भरा है तो मछली चींटी को खा रही है फिर तालाब खाली भी होगा और चीटियां मिलकर बड़ी से बड़ी मछली कों खा जाएंगी। समझदार कों इशारा काफ़ी है। 

मुख्यमंत्री जी कृपया स्कूलों में शिक्षा शुरू हो जाने दीजिए

खैर इस वक्त तो प्रदेश के मुखिया जी से इस खुले ख़त के माध्यम से निवेदन है कि शिक्षा विभाग पर लगाम लगाइये। इसे प्रयोगों की मंडी मत बनने दीजिये। इसका बुरा असर प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों उनके परिवारों और लाखों विद्यार्थिओं पर पड़ रहा है। जो भी नियम कानून बनाने हों, वह इत्मीनान से ग्रीष्म अवकाश में बना लेना। तब तक कृपया जो जैसा है उसे यथावत रहने दीजिये, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था जो थोड़ी बहुत बची है वह बची रहे। छोटा मुंह बड़ी बात किन्ही शब्दों से यदि किसी कों ठेस पहुंची हो या कोई आहत हुआ हो तो कृपया क्षमा करें किन्तु जो यथार्थ सत्य है सो है। 🙏🙏 आनंद कुमार नामदेव। 

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