मध्य प्रदेश में भगवान श्री राम 16 साल से कलेक्टर की कैद में, हताश भक्त नए भगवान ले आए

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कलेक्टर ने पिछले 16 सालों से भगवान श्री राम की 100 साल प्राचीन प्रतिमा को कैद कर रखा है। नियम अनुसार उन्हें विस्थापित किया जाना है परंतु 16 सालों में किसी भी कलेक्टर ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने आवेदन निवेदन किए थे, लेकिन कलेक्टर ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने एक नया मंदिर बनवाया और उसके लिए नए भगवान ले आए। 100 साल प्राचीन प्रतिमा मैले कपड़ों में लिपटी हुई, एक दुकान में बंद है। 

शिवपुरी जिले के अमोला गांव का इतिहास

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की करैरा तहसील के अंतर्गत आने वाला अमोला गांव सिंधु नदी के किनारे बसा हुआ था। इसे चौहानों की जागीर कहते थे। नदी के किनारे होने के कारण यहां पर कई मंदिरों का निर्माण किया गया था। सबसे भव्य मंदिर का नाम था "राज दरबार", इसमें भगवान श्री राम का पूरा दरबार सजाया गया था। ग्रामीण बताते हैं कि यह मंदिर कम से कम 100 साल पुराना है। सन 2008 में सरकार ने विकास के नाम पर अटल सागर बांध का निर्माण करवाया और उसके कारण पूरा अमोला गांव पानी में डूब गया। गांव को विस्थापित करके अमोला 1, 2, 3, नाम से कॉलोनी बनाई गई और सिरसौद गांव में सभी ग्रामीणों को शिफ्ट कर दिया गया। 

कलेक्टर ने भगवान श्री राम को लावारिस छोड़ दिया, भगवान पानी में डूबे रहे

जब किसी गांव का विस्थापन किया जाता है तो उसमें इंसानों के अलावा पशु-पक्षी और मंदिर इत्यादि सभी संपत्ति शामिल होती है। शिवपुरी कलेक्टर ने ग्रामीणों को तो सरसोद में विस्थापित कर दिया परंतु सभी मंदिरों को लावारिस छोड़ दिया। आसपास के सैकड़ो गांव के आस्था का केंद्र राज मंदिर भी लावारिस छोड़ दिया गया। बांध में जब वाटर लेवल बढ़ता, तो मंदिर पानी में डूब जाता। कलेक्टर ने विस्थापित हुए गांव में मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था परंतु उसे अधूरा छोड़ दिया। 

कलेक्टर ने ग्रामीणों को भी प्राण प्रतिष्ठा नहीं करने दी

ग्रामीणों ने अपने स्तर पर धन जमा करके एक भव्य मंदिर बनवाया। वह चाहते थे कि राज मंदिर, फिर से भव्य स्वरूप में आ जाए। डूब में आए हुए मंदिर में रखी हुई मूर्तियों को नए मंदिर में स्थापित करना चाहते थे परंतु कलेक्टर ने मंजरी नहीं दी। मजबूरी में गांव वाले जयपुर से भगवान श्री राम की नई प्रतिमाएं लेकर आए और निर्धारित शुभ मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा की गई। 

कलेक्टर ने 100 साल प्राचीन भगवान श्री राम दरबार की प्रतिमाओं को पानी में डूबे हुए मंदिर से बाहर निकालकर  एक दुकान में बंद करवा दिया है। कलेक्टर की मर्जी के बिना प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हो सकती और कलेक्टर कुछ भी करने को तैयार नहीं है। अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर यह मुद्दा एक बार फिर से गर्म हुआ। शिवपुरी विधायक श्री देवेंद्र जैन ने भी कलेक्टर को विधिवत पत्र लिखा परंतु शिवपुरी कलेक्टर श्री रविंद्र कुमार चौधरी कोई पहल करने को तैयार नहीं है। 

कलेक्टर आज भी भगवान की प्राण प्रतिष्ठा को तैयार नहीं

शिवपुरी कलेक्टर ने ताजा बयान दिया है कि, करैरा एसडीएम को ग्रामीणों से बात कर जल्दी इसका समाधान करने को कहा है। सवाल यह है कि जब कोई विवाद ही नहीं है। पूरा गांव भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा करना चाहता है। जमीन को लेकर कोई डिस्प्यूट नहीं है। यहां तक की गांव वाले अपनी जमीन देने को तैयार है। उन्होंने अपने पैसे से भव्य मंदिर का निर्माण करवा लिया, तो विवाद कहां है। 

रावण होता तो मार देते, कलेक्टर से कैसे लड़ें 

पिछले 16 सालों से भगवान श्री राम कलेक्टर की कैद में है। रावण होता तो मार भी देते। रावण कितना भी शक्तिशाली था लेकिन एक छोटी सी लंका का राजा था। कलेक्टर से कैसे लड़े। कलेक्टर तो इतने बड़े भारत की प्रशासनिक सेवा का अधिकारी है। विस्थापित किए गए लोगों को जब कलेक्टर की तरफ से न्याय नहीं मिलता तो वह भगवान के पास आते हैं। यहां भगवान ही कलेक्टर से पीड़ित है, किसके पास जाएं।

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