MP NEWS- अधिकारी के कहने पर रिश्वत की रकम प्राप्त करने वाले ड्राइवर को 4 साल जेल की सजा

Bhopal Samachar
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में नेपानगर नगर पालिका के ड्राइवर अनिल गावंडे को 4 साल कठोर कर आवास की सजा सुनाई गई है। उसका अपराध यह था कि उसने मुख्य नगर पालिका अधिकारी के कहने पर रिश्वत की रकम प्राप्त की थी। कोर्ट में ट्रायल के दौरान यह साबित हुआ कि, ड्राइवर को पता था कि जो धनराशि वह प्राप्त कर रहा है, वह रिश्वत है। इसके बाद भी उसने सीएमओ के स्थान पर रिश्वत की रकम प्राप्त की। 

BURHANPUR NEWS- मुख्य आरोपी सीएमओ के खिलाफ 9 साल बाद भी चालान नहीं 

लोकायुक्त पुलिस की यह ट्रैप कार्रवाई नवंबर 2014 में हुई थी। करीब नौ साल बाद फैसला आया है। लोकायुक्त पुलिस ने गावंडे को सीएमओ की ओर से 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। तत्कालीन सीएमओ सुधाकर कुबड़े के खिलाफ लोकायुक्त की ओर से अब तक अभियोग पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण कार्रवाई लंबित रखी गई है। लोक अभियोजन अधिकारी कैलाशनाथ गौतम ने बताया कि आरोपित को यह सजा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)डी , 13(2) के अंतर्गत सुनाई गई है। 

सप्लायर से मांगा था 32 प्रतिशत कमीशन

जिला लोक अभियोजन अधिकारी कैलाशनाथ गौतम ने बताया कि 13 नवंबर 2014 को नगर पालिका नेपानगर के सप्लायर अजय ओसवाल निवासी बड़वाह जिला खरगोन ने लोकायुक्त पुलिस इंदौर को लिखित शिकायत की थी। इसमें बताया था कि वह नगर पालिकाओं में सामग्री सप्लाई का कार्य करता है। उसने नेपानगर में लगभग 1.80 लाख रुपये की स्वच्छता सामग्री, जल संधारण और विद्युत सामग्री सप्लाई की थी। वैट टैक्स व टीडीएस काटकर लगभग 1,75000 रुपये का भुगतान करने के बदले सीएमओ कुबड़े 32 प्रतिशत यानी 56 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं।

साहब का आदेश करने के कारण ड्राइवर फंस गया 

लोकायुक्त पुलिस ने इसकी रिकार्डिंग कर ट्रैप करने के लिए जाल बिछाया। अजय ओसवाल जब रिश्वत की पहली किस्त के 12 हजार रुपये देने पहुंचा तो सीएमओ कुबड़े ने अपने ड्राइवर दैवेभो कर्मचारी अनिल गावंडे को राशि देने के लिए कहा। गावंडे ने जैसे ही राशि ली, लोकायुक्त पुलिस ने उसे गिरफ्तार किर लिया था। लोकायुक्त निरीक्षक अनिल सिंह चौहान द्वारा विवेचना की गई थी। 

लोकायुक्त पुलिस ने ऐसा क्यों किया

इस मामले में ध्यान देने योग्य बात यह है कि, लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वतखोरी के मुख्य आरोपी अधिकारी के खिलाफ 9 साल बाद चलन तक पेश नहीं किया, जबकि नगर पालिका के सबसे वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर रिश्वत की रकम प्राप्त करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सजा दिलाने के लिए पूरी निष्ठा से काम किया।

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