Small Business Ideas- मात्र 5 लाख का GB PLANT, 1 लाख महीने की कमाई देगा

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कुछ लोग चुनौतियों से डरते हैं, लेकिन बिजनेस करना चाहते हैं। ऐसे लोग 25-30 लाख रुपए में चायवाला की फ्रेंचाइजी ले लेते हैं। बाद में क्या होता है, आपको खुद पता है, बहुत सारे वीडियो वायरल हो रहे हैं। अपन आज एक ऐसे मजबूत प्रोडक्ट का प्लांट स्थापित करने के बारे में डिस्कस करेंगे जो आने वाले 15 सालों तक हर साल 20% से अधिक की ग्रोथ लेगा। फिलहाल इसको मात्र ₹500000 के इन्वेस्टमेंट से शुरू किया जा सकता है और महीने का ₹100000 नेट प्रॉफिट बनाया जा सकता है। 

Business Opportunity 

भारत तेजी से विकसित हो रहा है और बाजार के विद्वानों का कहना है कि अगले 15 साल तक भारत में बड़े पैमाने पर कंस्ट्रक्शन होंगे। लोग होम लोन लेकर घर बना रहे हैं और जिनको बैंक होम लोन लेने के लिए तैयार नहीं है उन्हें सरकार घर बनाने के लिए पैसे दे रही है। कुल मिलाकर ग्राम पंचायत से लेकर स्मार्ट सिटी तक हर जगह कंस्ट्रक्शन हो रहा है। जब बाजार इतना बड़ा हो गया है तो फिर अपन को भी अपनी भूमिका निर्धारित करनी चाहिए। यही वक्त है जब अपन लोगों की मदद कर सकते हैं और प्रॉफिट कमा सकती हैं। 

New Business Plan

GREEN BRICKS PLANT स्थापित करना है। इसमें अपन लाल मिट्टी की ईट और कंक्रीट के ब्लॉक से अलग कार्बन नेगेटिव ईटें बनाएंगे। जिसे अपन ने GREEN BRICKS नाम दिया है। इन ईटों की विशेषता यह होती है कि इनका प्रोडक्शन लाल मिट्टी की ईट की तुलना में काफी सस्ता होता है और यह घर के अंदर रहने वाले लोगों को घर के बाहर मौजूद प्रदूषण से सुरक्षित करती हैं। इसीलिए इन्हें कार्बन नेगेटिव ईटें कहा जाता है। फिलहाल भारत में इसके केवल 10-12 प्लांट चल रहे हैं और सभी काफी मुनाफे में है। 

प्रोडक्शन कॉस्ट क्या आएगी

लाल मिट्टी की ईंटों को बनाने के बाद पकाने के लिए 1000 डिग्री सेंटीग्रेड पर उन्हें गर्म करना पड़ता है। इसके लिए बहुत सारा कोयला खर्च होता है जबकि GREEN BRICKS को पकाने की जरूरत नहीं पड़ती। मात्र 2 सप्ताह तक सूरज की धूप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है और यह लाल मिट्टी की ईट से वजन में हल्की लेकिन ताकत में मजबूत होती है। दोनों के टकराने पर लाल मिट्टी की ईंट टूट जाती है। 8 लाल मिट्टी की ईंट के बराबर GREEN BRICKS बनाने का प्रोडक्शन कॉस्ट मात्र ₹26 आता है। यानी एक ईट 3.25 रुपए की पड़ती है। 

लोग क्यों खरीदेंगे

दिल्ली और उसके ऊपर पहाड़ी इलाकों में कार्बन नेगेटिव ईटो की डिमांड इतनी ज्यादा है कि, गर्मी के मौसम में जब कंस्ट्रक्शन का काम तेजी से चलता है तब लोगों को या तो एडवांस आर्डर देना पड़ता है या फिर इंतजार करना पड़ता है। लोगों को फायदा यह होता है कि लाल ईट की तुलना में यह सस्ती पड़ती है। इसकी दीवार सीधी होती है। इसमें मजदूरी 1/4 लगती है। मसाला 1/3 लगता है, प्लास्टर भी पतला लगता है। यानी हर कदम पर बचत होती चली जाती है, और सबसे खास बात यह है कि थर्मल इंसुलेशन सबसे बेहतर होता है, घर के अंदर प्रदूषण और धुआं नहीं आता। 

क्या स्पेशल होता है कैसे बनाएंगे

इसको बनाने के लिए वही मशीन लगती है जो सीमेंट कंक्रीट के ब्लॉक बनाने के लिए लगती है। इसके अलावा एक थ्रेसर खरीदना पड़ता है। खेतों में फसलों का खतरा यानी भूसा और पराली को थ्रेसर की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर केमिकल के साथ कंक्रीट मसाले में मिला दिया जाता है। किसानों की फसल का कचरा ही अपनी ग्रीन ब्रिक्स की USP है। केमिकल का कैलकुलेशन सीखने के लिए आपको खुद मेहनत करनी पड़ेगी। 

प्रॉफिट कितना होगा 

  • बाजार में लाल ईट 6-8 रुपए की बिकती है। 
  • 8 लाल ईटX₹8 = ₹64
  • एक GREEN BRICKS (जो 8 ईटों के बराबर होती है) की प्रोडक्शन कॉस्ट ₹26 
  • यानी ₹38 का अंतर है। 
  • यह बिजनेस D2C चलता है यानी प्रोडक्शन यूनिट से डायरेक्ट कंजूमर तक पहुंचाया जाता है। इसलिए बीच के चैनल का कमीशन नहीं देना पड़ता है। 
  • ₹500000 वाली मशीन 1 घंटे में 700 GREEN BRICKS बनाती है। 
  • यानी 5 घंटे में 3600 GREEN BRICKS बनकर तैयार हो जाएगी। 
  • 3600X26= 93600 रुपए प्रोडक्शन कॉस्ट आएगी। 
  • ₹64 की बजाय ₹54 में बेचा तो एक ईट पर ₹28 का ग्रॉस प्रॉफिट। 
  • 3600 ईटों पर 3600X28= 100800 रुपए का ग्रॉस प्रॉफिट। 
  • इसमें मजदूरी, प्लांट का किराया, बिजली, ट्रांसपोर्टेशन, सेल्स एंड मार्केटिंग और ठेकेदार का कमीशन घटाने के बाद कम से कम 10% नेट प्रॉफिट तो बचेगा ही। 

इस हिसाब से ₹300000 महीने हुआ और अपन तो ₹100000 महीने का शुरुआती टारगेट लेकर चल रही है, क्योंकि शुरुआत में ऑर्डर थोड़ी कम भी आ सकते हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

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