साबुन से हाथ धोने की परंपरा कब किसने और कहां से शुरू की, पढ़िए आश्चर्यजनक तथ्य- GK in Hindi

Bhopal Samachar
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हाथ तो हम सभी धोते हैं। स्कूलों में बच्चों को सिखाया जाता है कि यदि वह एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए हैंड वॉश नहीं करेंगे तो उनके बीमार होने का खतरा बढ़ जाएगा। अब तो बाजार में हाथों को क्लीन करने के लिए सैनिटाइजर भी आने लगे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं लगभग 183 साल पहले तक पृथ्वी पर इंसान हैंड वॉश नहीं करते थे। हाथों को साफ करने के लिए अक्सर कपड़ों का उपयोग करते थे और बहुत ज्यादा गंदे हो जाएं तो थोड़ा पानी डाल दिया करते थे। 

Amazing facts in Hindi about hand wash

यह एक बेहद मजेदार और आश्चर्यजनक जानकारी है। सन 1839 में हंगरी के डॉक्टर और वैज्ञानिक डॉ. इग्नाज सेमेल्विस (Dr Ignaz Semmelweis) दुनिया को पहली बार बताया कि, हाथों में कीटाणुओं के कारण इंसानों, खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर काफी ज्यादा है। यदि साबुन जैसी किसी चीज से हाथ को साफ किया जाए तो यह मृत्यु दर कम हो जाएगी। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि लोगों को साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने साबुन से हाथ धोने के तरीके भी बताए। 

हैंड वॉश के तरीकों का आविष्कार करने वाले डॉक्टर को कैद कर दिया

कहते हैं ना कि दुनिया के हर अविष्कार का सबसे पहले मजाक उड़ाया जाता है। इस मामले में इससे कुछ ज्यादा हुआ। डॉक्टर्स की कम्युनिटी ने डॉ. इग्नाज सेमेल्विस को पागल इंसान घोषित कर दिया और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया क्या। कई डॉक्टरों का मानना था कि साबुन जैसे केमिकल को हाथ में लगाने से हाथ और ज्यादा प्रदूषित हो जाएगा और मृत्यु दर बढ़ जाएगी। 

सन 1840 में डॉक्टर इग्नाज सेमेल्विस का प्रस्ताव वियना में लागू किया गया और इसके चमत्कारी परिणाम सामने आए। गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर जो 18% से अधिक थी घटकर 1% रह गई। माता के हैंड वॉश करने के कारण नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में भी आश्चर्यजनक कमी देखी गई। इसके बाद दुनियाभर में Dr Ignaz Semmelweis की हैंड वॉच थ्योरी को मान्यता दी गई और उन्हें दुनिया का महान वैज्ञानिक माना गया। 

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