MP NEWS- सैकड़ों 12th टॉपर्स को लैपटॉप नहीं दिए, क्योंकि मंत्री जी का मूड बदल गया था

भोपाल
। कहने को तो लोकतंत्र में सरकार के मंत्री जनता के साथ न्याय करने और अन्याय को रोकने के लिए होते हैं परंतु कभी-कभी वो स्वयंभू भी हो जाते हैं। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत सैकड़ों स्टूडेंट्स को टॉप करने के बावजूद लैपटॉप नहीं दिए क्योंकि मंत्री जी ने योजना में एक ऐसा बदलाव कर दिया जिसका लॉजिक शायरी किसी की समझ में आए।

संक्षिप्त में पढ़िए मामला क्या है:- 

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा उससे संबंधित स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया में देरी की गई। एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद मध्य प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने कई स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी। इन स्कूलों के बच्चों का परीक्षा में नामांकन रेगुलर स्टूडेंट के रूप में हुआ था और जब रिजल्ट आया तो उस पर प्राइवेट लिखा था। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री इंदर सिंह परमार का कहना है कि इस साल हमने प्राइवेट स्टूडेंट को योजना में शामिल नहीं किया था। इसलिए उन्हें टॉप करने के बावजूद लैपटॉप नहीं दिए गए। 

स्टूडेंट्स के सिर्फ 3 सवाल
1. स्कूल की मान्यता निरस्त करनी थी तो एडमिशन से पहले करना चाहिए था। उसे दंडित कीजिए जिसने एडमिशन के बाद मान्यता की कार्रवाई का सिस्टम बनाया। स्टूडेंट की क्या गलती है, उन्होंने तो रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन लिया था। 

2. यदि कार्रवाई करनी है तो स्कूल संचालक के खिलाफ कीजिए। उसके अगले साल की मान्यता समाप्त कर दीजिए। उस पर जुर्माना लगाइए। उसे गिरफ्तार कर लीजिए। स्टूडेंट की क्या गलती थी। उन्हें क्यों तंग किया जा रहा है। 

3. स्टूडेंट रेगुलर हो या प्राइवेट, परीक्षा तो एमपी बोर्ड में कराई ना। टॉपर, टॉपर होता है। वह रेगुलर और प्राइवेट कब से हो गया। कल कहोगे कि प्राइवेट स्टूडेंट को नौकरी नहीं देंगे। बल्कि प्राइवेट वालों को एप्पल का लैपटॉप देना चाहिए। उन्होंने घर बैठे पढ़ाई की। स्कूल नहीं आए फिर भी टॉप किया। उनको पढ़ाने के लिए किसी शिक्षक को सैलरी नहीं देनी पड़ी। किसी स्कूल का खर्चा नहीं उठाना पड़ा।