दुनिया के सबसे अनोखे पांच मंदिर, सबको पता होना चाहिए- Amazing facts in Hindi

Bhopal Samachar
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वैसे तो हर मंदिर अपने आप में पर्याप्त और पूर्ण होता है। जहां जिसकी श्रद्धा जागृत हो जाए। जिस प्रतिमा के चरणों में जिसकी भक्ति लग जाए। उसके लिए वही मंदिर तीर्थ स्थल हो जाता है लेकिन फिर भी शास्त्रार्थ (डिबेट) के अवसर पर नॉलेज और इंफॉर्मेशन अनिवार्य है। इसलिए हम आपको बताते हैं दुनिया के 10 ऐसे मंदिर जो अपने आप में अद्भुत है और कोई ना कोई रिकॉर्ड इनके नाम दर्ज है। 

विश्व का सबसे बड़ा मंदिर 

प्राचीन नगर यशोधरपुर जिसे आज अंकोर के नाम से पुकारा जाता है और वर्तमान दुनिया के नक्शे में कंबोडिया में स्थित है। यहीं पर दुनिया का सबसे पुराना मंदिर अंकोरवाट स्थापित है। यह मंदिर 402 एकड़ यानी 1,626,000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। इस मंदिर को खमेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने बनवाया था। इसे एशिया के सबसे बड़े प्राचीन हिंदू मंदिर का दर्जा प्राप्त है। 

विश्व का सबसे पुराना मंदिर 

जर्मन देश के पुरातत्वविद क्लॉस श्मिट ने सन 2008 में घोषित किया है कि 'गोबेकली टेप' दुनिया का सबसे पुराना (सन 2008 तक मनुष्यों की जानकारी में) मंदिर है। 8000 ईसा पूर्व, यह पूरा मंदिर मिट्टी के नीचे दब गया था। इस मंदिर की संरचनाओं को स्टडी और रिसर्च के लिए संरक्षित किया गया है। 

विश्व का सबसे बड़ा मंदिर परिसर

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु, भारत (Sri Ranganathaswamy temple Tiruchirapalli) विश्व का सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। यह मंदिर परिसर 6 मील से अधिक लंबाई में सात संकेंद्रित दीवारों (जिसे प्राकारम (बाहरी प्रांगण) या मैथिल सुवर कहा जाता है) से घिरा है। यहां भगवान विष्णु को समर्पित कुल 49 मंदिर हैं। श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर परिसर इतना विशाल है कि आप इसे एक भरा पूरा शहर कह सकते हैं। 

फ़ारस की खाड़ी में सबसे पुराना हिंदू मंदिर

मोतीश्वर शिव मंदिर ओमान देश के पुराने मस्क़त शहर के मुत्तरह इलाके में अल आलम पैलेस के पास स्थित एक हिंदू मंदिर परिसर है। यह फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थित सबसे पुराना हिंदू मंदिर है। 

भारत का सबसे पहला मंदिर 

मुंडेश्वरी देवी का मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में पवरा पहाड़ी पर 608 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी स्थापना 108 ईस्वी में हुविश्क के शासनकाल में हुई थी। यहां शिव और पार्वती की पूजा होती है। प्रमाणों के आधार पर इसे देश का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है।
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