दिग्विजय सिंह- कोई कुछ भी कहे लेकिन सेहरा लेने के बाद शादी टूट जाए तो... - My opinion

भोपाल
। कल दिन भर दिग्विजय सिंह समर्थक खुद को और दिग्विजय सिंह को मोटिवेट करने के लिए काफी कोशिश करते रहे। आज सुबह-सुबह भी दिग्विजय सिंह ने खुद को और अपने समर्थकों को मोटिवेट करने के लिए रहीम का दोहा शेयर किया है परंतु कोई कुछ भी करे, सेहरा खरीदने के बाद यदि शादी टूट जाए तो फीलिंग कुछ अजीब सी होती है।

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच कर वापस लौटे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने निराश हुए समर्थकों को मोटिवेट करने के लिए रहीम का एक दोहा अपनी वॉल पर लिखा है:- 
चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बे परवाह।
जाके कछु नहीं चाहिए, वे शाहन के शाह।।
इसके भावार्थ पर फिर कभी बात करेंगे परंतु फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि घाव ताजा है और दर्द केवल दिग्विजय सिंह को नहीं बल्कि और भी बहुत सारे लोगों को हो रहा है, जो किसी भी रहीम और कबीर के दोहे से फिलहाल कम नहीं होगा। 

क्या दिग्विजय सिंह का राजयोग खत्म हो गया है

अब यह समीक्षा करने का कोई अवसर नहीं रहा कि दिग्विजय सिंह ने ऐसा क्या किया था जो उनकी अपनी कांग्रेस पार्टी में उनकी उम्र के समकक्ष नेताओं ने उनके खिलाफ ना केवल लामबंदी की बल्कि उन्हें एक झटके में चित भी कर दिया। यदि दिग्विजय सिंह मल्लिकार्जुन खड़गे का इतना सम्मान करते हैं (जैसा कि उन्होंने कहा)। तो क्या मल्लिकार्जुन, दिग्विजय सिंह को स्नेह नहीं करते (यदि करते तो दिग्विजय सिंह द्वारा नामांकन फॉर्म लेने के बाद चुनाव लड़ने के लिए क्यों तैयार होते)। 

वैसे सोचने वाली बात तो यह भी है कि जब दिल्ली के अखबार बता रहे हैं कि दिग्विजय सिंह के नामांकन फॉर्म लेने के बाद कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं ने दिग्विजय सिंह को रेस से बाहर करने के लिए मल्लिकार्जुन का नाम बढ़ाया तो फिर भोपाल में कमलनाथ ने ऐसा क्यों कहा कि मल्लिकार्जुन का नाम तो पहले से चल रहा था। 

जो भी हो लेकिन एक बात जरूर सोचना चाहिए कि क्या दिग्विजय सिंह का राजयोग खत्म हो गया है। जो व्यक्ति अपनी ग्राम पंचायत से बढ़ते-बढ़ते मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बन गया। वह व्यक्ति भोपाल का लोकसभा चुनाव हार गया, वह भी तब जबकि मिर्ची बाबा, कंप्यूटर बाबा और पता नहीं कितने बाबाओं ने उनके लिए अपनी पूरी शक्तियां लगा दी थी। 

भारत जोड़ो यात्रा के संयोजक बने थे। मध्यप्रदेश में समर्थकों में उत्साह था। कद बढ़ गया था, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक दौड़ने और छोड़ने के बाद एक बार फिर बिल्कुल वैसा ही माहौल है जैसा कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उमा भारती के सामने चुनाव हार जाने के बाद था। ✒उपदेश अवस्थी

यह वीडियो श्री दिग्विजय सिंह ने शेयर किया है आप भी सुनिए