MP NEWS- पशुपालकों के लिए गाइडलाइन एवं मुख्यमंत्री की अपील

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पशुपालकों के नाम अपील जारी की गई है। इस अभियान में उन्होंने लंपी वायरस से बचाव के लिए निर्धारित गाइडलाइन के बारे में बताया है और पशुपालकों को आश्वस्त किया है कि उनके पशुओं को इस संक्रमण से बचाने के लिए सरकार दिन रात काम कर रही है। 

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपनी अपील में कहा है कि, “पशुओं के संक्रमित होने के बाद लंपी वायरस तेजी से फैलता है। इसलिए बेहतर है कि कुछ सावधानियां रखकर पशुओं को संक्रमित होने से बचाया जाए। जो सावधानी है, मैं उसके बारे में भी आपको बता रहा हूं:- 
1.किसी भी एक पशु में लक्षण दिखने पर तुरंत उसे बाकी पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें। 

2. पशुओं को मक्खी, मच्छर, जूं आदि परजीवियों से बचा कर रखें। 
3. संक्रमित इलाके में कीटाणुनाशक का छिड़काव करें। 
4. लंपी वायरस से मृत पशुओं के शव को खुले में ना छोड़ें बल्कि गहरा गड्ढा करके उसमें दफना दें। 
5. सरकार की तरफ से फ्री में टीका लगाया जा रहा है, ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण इस रोग की रोकथाम कर सकता है इसलिए टीकाकरण कराएं। 
6. हमारे पशु-चिकित्सक और बाकी अमला उपचार और रोग के संबंध में आपको सहयोग करने के लिए और परामर्श देने के लिए उपलब्ध हैं। 

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, सरकार आपके साथ खड़ी है लेकिन चिंता हम सबको मिलकर करनी है। जैसे कोविड-19 से इंसानों के बचाव के लिए हमने लड़ाई लड़ी थी वैसे ही अपने गोवंश के लिए, बाकी पशुओं को बचाने के लिए हमको यह लड़ाई लड़नी पड़ेगी। आइए, पूरी तरह से लंपी वायरस को हराने के लिए हम कमर कस लें और काम में जुट जाएं। 

“विश्व के कल्याण में चाहे गौ-वंशी हो या भैंस - वंशी हो, हमारे इन पशुओं का कल्याण भी शामिल है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हम तत्काल इस रोग के लक्षण को पहचानें। लंपी वायरस से संक्रमित होने वाले पशुओं में कई तरह के बदलाव आते हैं। अगर आपके पशुओं में यह लक्षण दिख रहे हों तो तत्काल उनका इलाज करवाएं। 

संक्रमित होने पर पशुओं को बुखार आने लगता है और वह सुस्त हो जाते हैं। पैरों में सूजन आ जाती है, आंखों से पानी और मुंह से लगातार लार निकलने लगती है। शरीर में गठान पड़ने लगती है, यह गठान गोल और उभरी हुई होती है। पशुओं का वजन कम होने लगता है और पूरे शरीर पर छोटे-छोटे घाव जैसे उभरे हुए निशान दिखाई देने लगते हैं। दूध देने वाले पशुओं का दूध भी बंद या कम हो जाता है। 

इसलिए इस रोग से अपने पशुओं को बचाने के लिए तुरंत उपाय करने की आवश्यकता है क्योंकि यह बीमारी पशुओं से पशुओं में फैलती है। यह रोग मच्छर, काटने वाली मक्खी इत्यादि के द्वारा भी एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है, लेकिन यह बीमारी पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलती।