MP NEWS- कारम नदी बांध मामले की CBI-ED जांच की मांग, विवेक तन्खा ने लिखा

भोपाल
। सुप्रीम कोर्ट के वकील एवं राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कारम नदी बांध मामले की CBI एवं ED दोनों केंद्रीय जांच एजेंसी से संयुक्त रूप से जांच कराने की मांग की है। विवेक तन्खा ने दावा किया है कि इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी शामिल हैं। यह एक ऐसा घोटाला है जिसमें रिश्वत की रकम का निर्धारण पहले हुआ उसके बाद बचे पैसे से बांध का निर्माण किया गया। 

विवेक तन्खा ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र में लिखा कि कल प्रदेश के लिए सबसे चिंताजनक खबर यह रही कि प्रदेश के धार जिले में भारूडपुरा और कोलिया गांव के बीच कारम नदी पर 304.44 करोड़ के प्रोजेक्ट वाला बाँध आखिरकार बारिश क्यों नहीं सम्हाल पाया। इस बांध से क्षेत्र के 50 गावों के किसानों को काफी उम्मीद थीं। यह जानकर संतोष हुआ कि आप वरिष्ठ अधिकारियों की टीम के साथ वल्लभ भवन के कंट्रोल रूम से धार के हालात पर सतत निगरानी कर रहे थे, ताकि जिले की स्थिति न बिगड़ने पाए प्रदेश के मुखिया होने के नाते आपकी चिंता स्वाभाविक भी थी। खैर, मौके पर पहुंचे अधिकारियों की सूझ-बूझ से चैनल बनाकर पानी के रुख को मोड़ दिया गया और वहाँ अब हालात सामान्य हो रहे हैं। 

बांध की दयनीय स्थिति पर आपकी यह चिंता अकारण नहीं थी। इस चिंता का कारण जानने के लिए बस आपको थोड़ा इतिहास में जाना होगा। जब अप्रैल 2018 में प्रदेश में ई टेंडर घोटाला सामने आया था। उस समय ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर 3 हजार करोड़ के 9 टेंडर में गड़बड़ी की गई थी। इस बाँध का ठेका भी इसी ई-टेंडरिंग घोटाले से जुड़ा हुआ है। 

2018 में कारम बांध निर्माण का कार्य एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी ANS कंस्ट्रक्शन को दिया गया था, लेकिन उसने यह कार्य खुद नहीं किया, बल्कि उसने इसे एक और ग्वालियर की एक ब्लॅकलिस्टेड कंपनी सारथी कंस्ट्रक्शन को पेटी कॉन्ट्रेक्ट में दे दिया प्रदेश के जल संसाधन मंत्री ने भी 10 मार्च 2022 को विधानसभा में स्वीकार किया था कि कारम डैम प्रोजेक्ट के टैंडर में गड़बड़ी हुई है। 

एक ब्लैकलिस्टेड कम्पनी द्वारा किये गए कार्य में गुणवत्ता के साथ कितना समझौता किया गया होगा, यह बाँध की हालत बयां करती है। मुझे प्राप्त जानकारी के अनुसार कारम बाँध निर्माण के टेंडर में मुख्यमंत्री कार्यालय के कुछ अधिकारी भी शामिल थे। यह घोटाला अन्य परंपरागत घोटालों से अलग है, क्योंकि इसमें रिश्वत की रकम पहले तय की गयी उसके बाद बचे हुए पैसों से निर्माण कार्य करवाया।