मध्य प्रदेश चुनाव ड्यूटी- क्या बीमार कर्मचारी को कलेक्टर VRS दे सकता है- MP employees news

भोपाल
। मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एवं नगर पालिका चुनाव चल रहे हैं। 2 जिलों के कलेक्टरों ने सर्कुलर जारी किया है। प्रचारित किया जा रहा है कि यदि कोई कर्मचारी अपनी बीमारी के कारण चुनाव ड्यूटी से मुक्त रहने के लिए आवेदन करता है तो उसे VRS दे दिया जाएगा। सवाल यह है कि क्या किसी बीमार कर्मचारी को कोई कलेक्टर सिर्फ इसलिए VRS दे सकता है, क्योंकि उसने एक अतिरिक्त दायित्व निभाने से इनकार कर दिया है।

बहानेबाज कर्मचारियों के लिए इस तरह की धमकियां अच्छी बात है लेकिन कई बार इस प्रकार की अफवाहें किसी बीमार आदमी की बीमारी को बढ़ाने का काम कर सकती हैं। यह बिल्कुल संभव है कि कोई कलेक्टर अपने अधीनस्थ कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए कार्रवाई प्रारंभ कर सकता है परंतु यहां नोट करना होगा कि कलेक्टर केवल कार्रवाई प्रचलित कर सकता है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति नहीं दे सकता।

उल्लेख अनिवार्य है कि किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति चुनाव कराने के लिए नहीं होती। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए यह अनिवार्य होता है कि, साबित किया जाए कि वह कर्मचारी जिस पद पर नियुक्त किया गया है, उसकी जिम्मेदारी निभाने के लिए फिजिकली अनफिट हो गया है। एक क्लर्क ऑफिस में बैठकर काम करता है। यदि वह किसी ऐसी बीमारी से ग्रस्त है जिसके कारण यात्रा नहीं कर सकता। तो निश्चित रूप से वह मतदान दल में शामिल होने से इंकार कर सकता है। इसके आधार पर उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति नहीं दी जा सकती।

उद्घोषणा:- चुनाव एक आवश्यक काम है और शासन के पास अधिकार सुरक्षित हैं कि वह अपने कर्मचारियों का आवश्यक कार्यों में उपयोग कर सकता है। कर्मचारी का कर्तव्य है और वह अतिरिक्त जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता परंतु दोनों जिलों के कलेक्टरों द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के बाद मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई है। सचमुच बीमार कर्मचारी परेशान हो गए हैं और उनका ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है। इसलिए जरूरी है कि उन्हें अवगत कराया जाए, क्योंकि हर कर्मचारी कामचोर नहीं होता और हर कलेक्टर के पास कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों की लिस्ट नहीं होती।

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है कि किस प्रकार के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखा जाएगा। किस प्रकार के कर्मचारियों को मतदान दल में शामिल नहीं किया जाएगा। बीमार कर्मचारियों को चुनाव के दूसरे कामों में लगाया जाएगा।