क्या है राजद्रोह कानून, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक क्यों लगाई जानिए- IPC Section 124A

Bhopal Samachar
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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून को स्थगित कर दिया हैं एवं केंद्र सरकार को इस कानून पर पुनः विचार करने को कहा हैं। देश के उच्चतम न्यायालय ने कानून को स्थगित करने के साथ साथ राजद्रोह के कोई भी नया केस दर्ज करने में रोक लगा दी है एवं इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में फिर होगी तब तक राजद्रोह के अपराध में किसी भी प्रकार का मामला या एफआईआर दर्ज होगी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने यह भी कहा है कि जिन लोगो पर राजद्रोह का केस चल रहा है एवं जेल में है वह जमानत के लिए न्यायालय में याचिका लगा सकते हैं।

जानिए कब और क्यों बनाया था राजद्रोह का कानून:-

यह कानून ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1870 में स्थापित किया गया था जिसके बाद सन् 1898 में इसमे संशोधन करके पुनः प्रतिस्थापित किया गया। तब इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार का विरोध करने वाले भारतीयों के स्वतंत्रता आंदोलन को कुचल देना एवं उन्हें खत्म कर देना। इस कानून पर महात्मा गांधी जी ने कहाँ था कि आईपीसी की धारा 124-क के अंतर्गत मुझे सदैव आरोपित किया गया हैं। भारतीय स्वतंत्रता के बाद भी यह धारा आज भी भारतीय दण्ड संहिता में बनी हुई थी बहुत से न्यायविदों ने मत दिया था कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 19(1) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण करता है एवं इस धारा में अपराध होना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

जानिए क्या हैं स्थगित राजद्रोह का कानून :-

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा  124 A के अंतर्गत यह अपराध उन व्यक्ति पर लागू होता है जो बोले गए, लिखे गए, संकेतों अथवा वीडियो के द्वारा भारत सरकार या राज्य सरकार के प्रति घृणा, अपमान, अशांति या हिंसा उत्पन्न करता है या उत्पन्न करने का प्रयत्न करता है। लेकिन सरकार की कटु आलोचना करना राजद्रोह का अपराध नहीं होता है।

भारत की सरकार की परिभाषा क्या है 

कानून में बताया गया है की भारत सरकार के प्रति घृणा उत्पन्न करना, हिंसा फैलाना या अपमान करना अपराध है यहाँ भारत सरकार के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों आती है, इसका उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति से नहीं है वरन सरकार के रूप में कार्य कर रहे उस व्यक्ति समूह से है जो सरकार के प्रशासन कार्य करने के लिए अधिकृत हैं। किसी राज्य या केंद्र के मंत्री को सत्ता से निकल बाहर करने या संसद द्वारा पारित किसी कानून का विरोध करना या रद्द कंरने के लिए शांति रूप से आंदोलन करना राजद्रोह का अपराध नहीं है।

राजद्रोह का कानून संवैधानिक है या असंवैधानिक महत्वपूर्ण निर्णय:-

धारा 124-A के नियम संविधान के अनुच्छेद 19(1) क में वर्णित वाक़् अभिव्यक्ति की मूलभूत अधिकारों पर अतिक्रमण नहीं करता है एवं यह असंवैधानिक भी नहीं है क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2)  में देश की सुरक्षा, नैतिकता, जनहित, शिष्टता, न्यायालय अवमान एवं मानहानि आदि पर उचित प्रतिबंध लगाए गए हैं।
देवी सरन बनाम राज्य एवं केदारनाथ बनाम बिहार राज्य के महत्वपूर्ण निर्णय में धारा 124(A) को संवैधानिक एवं वैध मना गया है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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