वह चोटी जो प्रलय में नहीं डूबी, जहां मनुष्य का अस्तित्व सुरक्षित रहा- Dharti Ke Rang

दुनिया का कोई भी धर्म शास्त्र उठा लीजिए, यह घटना का उल्लेख समान रूप से मिलता है। पृथ्वी पर प्रलय आया था। सब कुछ डूब गया था लेकिन फिर भी मनुष्य जाति जीवित रही। कुछ जीव-जंतु भी सुरक्षित रहे। श्रीलंका के पर्यटन विशेषज्ञ दावा करते हैं कि उनके देश में वह चोटी है जहां पर प्रलय के दौरान मनुष्य एवं जीव जंतु सुरक्षित रहे, और प्रलय समाप्त हो जाने के बाद पृथ्वी पर जीवन और विकास फिर से प्रारंभ हो सका। 

पहाड़ की चोटी को आदम चोटि या एडम की चोटी (श्रीलंका एडम की चोटी) कहा जाता है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 2243 मीटर है। बौद्ध अनुयाई मानते हैं कि यहां पर भगवान बुद्ध के चरण चिन्ह हैं। शिव भक्तों का मानना है कि यह भगवान शिव की चोटी है। सबकी अपनी-अपनी मान्यता लेकिन सभी मान्यताओं में यह पर्वत पवित्र है और पूज्य है। पर्वत कोसमानल कंद और बटरफ्लाई माउंटेन भी कहा जाता है। 

दिसंबर से लेकर मई के महीने तक यह पर्वत पर्यटकों के लिए उपयुक्त माना जाता है। हालांकि किसी भी स्थिति में इस पर्वत की चोटी तक पहुंचना आसान नहीं होता परंतु काफी रोमांचकारी होता है और श्रद्धालुओं के लिए यह किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं है। लोकप्रिय, रोमांचकारी और धार्मिक पर्यटक स्थलों के बारे में जानने के लिए कृपया Dharti Ke Rang पर क्लिक करें.