MP TET VARG 3 TOPIC- बालकों का मानसिक स्वास्थ्य

Mental health of children

एमपी टेट वर्ग 3 (मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा) के लिए "बालकों का मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार संबंधी समस्याएं" टॉपिक में से आज हम बालकों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में चर्चा करेंगे। 

जैसा की हम जानते ही हैं की शरीर और मन का बड़ा घनिष्ठ संबंध संबंध है। एक कहावत भी है की "स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है"  यानी " A healthy mind lives in a healthy body. " मानसिक स्वास्थ्य का उद्देश्य व्यक्ति की प्राकृतिक इच्छाओं का दमन करना नहीं है बल्कि ऐसी परिस्थिति उत्पन्न करना है जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हुए जीवन बिता सके। 

जैसे-जैसे सभ्यता का विकास का विकास होता जा रहा है, वैसे वैसे मनुष्य का जीवन जटिल होता जा रहा है। उसकी प्राकृतिक इच्छाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण मनुष्य के मन में असंतोष उत्पन्न होने लगा है और अब वह मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने लगा। इसी कारण  ऐसे स्वास्थ्य विज्ञान की आवश्यकता हुई जिसका संबंध मन के साथ हो, इसी कारण मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का जन्म हुआ। 

मानसिक स्वास्थ्य का क्या अर्थ है / what is the meaning of Mental Health Health

मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान के प्रमुख प्रवर्तक डब्लू  क्लिफोर्ड बियर्स (W. Clifford Bears) हैं और उन्होंने अपनी एक बुक "ए माइंड डेट फाउंड इटसेल्फ" में इसका वर्णन किया है। मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसके द्वारा हम मानसिक स्वास्थ्य को स्थिर रखते हैं तथा पागलपन और स्नायु संबंधी रोगों को पनपने से रोकते को पनपने से रोकते हैं। 

साधारण स्वास्थ्य विज्ञान में केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है परंतु मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान में मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी सम्मिलित किया किया जाता है क्योंकि बिना शारीरिक स्वास्थ्य के मानसिक स्वास्थ्य संभव नहीं हो सकता। 

गौरतलब है कि मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) सभी का होता है परंतु मानसिक अस्वस्थता(Mental illness) एक बीमारी है जिसका उपचार होना जरूरी होना जरूरी है और शिक्षक बनने से पहले सनद रहे कि बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर शिक्षक ,शिक्षण प्रक्रिया, पाठ्यक्रम,विद्यालय का माहौल, सबका प्रभाव पड़ता है। 

मानसिक स्वास्थ्य के नियम / laws of Mental Health Health  

चूँकि मानसिक स्वास्थ्य का संबंध शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मन से भी है और किसी के  मन के बारे में सबसे अच्छी सूचना संवेग (Emotions) ही देते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ संवेगों के द्वारा ही मापा जाता है। मैक्डूगल ने मूल संवेगों की संख्या 14 मानी है और इन्हें तीन भागों में विभाजित किया है।
1) आत्म रक्षा संबंधी संवेग( Self defensive  emotions) 
2) सामाजिक जीवन संबंधी संवेग ( Social Life Emotions) 
3) जाति रक्षा संबंधी संवेग( Race defensive emotions) 

आत्मरक्षा संबंधी संवेगों में भूख, प्यास, भागने और लड़ने की मूल प्रवृत्तियां पाई जाती हैं जाती मूल प्रवृत्तियां पाई जाती हैं। दूसरे भाग में सामूहिकता, आत्मगौरव  जैसी मूल प्रवृत्तियां पाई जाती हैं। तीसरे भाग में काम एवं शिशु सुरक्षा (Sex and Parental instints) संबंधी प्रवृतियां पाई जाती हैं। इन प्रवृत्तियों को क्रमशः प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक आवश्यकता भी कहा जा सकता है। 

बाल मन को स्वस्थ रखने के लिए उसकी मूल प्रवृत्तियों का दमन नहीं करना चाहिए कई बार मूल प्रवृत्तियों मूल प्रवृत्तियों की अभिव्यक्ति ना होने के कारण बच्चे निष्क्रिय हो जाते हैं और बालक की जो अतृप्त इच्छा इच्छा अचेतन मन में दबी रहती है वह "भावना ग्रंथि"  "Emotional Gland" बन जाती है और वह किसी ना किसी रूप में बाहर जरूर आती है। इसे स ही मानसिक अस्वस्थता कहा जाता है। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.