MP TET VARG 3 Topic- बाल केंद्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा

Concept of Child Centered and Progressive Education

एमपी टेट वर्ग 3 में बाल केंद्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है जिसमें से आज हम बाल केंद्रित शिक्षा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करेंगे। 

"वर्तमान समय में शिक्षा बालक के लिए है, बालक शिक्षा के लिए नहीं है" जबकि प्राचीन काल में ऐसा माना जाता था कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ बालकों के मस्तिष्क में कुछ जानकारियों को भरना होता है परंतु आधुनिक शिक्षा शास्त्र में बालकों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है। जिसमें बाल मनोविज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए वर्तमान समय में बाल केंद्रित शिक्षा का महत्व बहुत अधिक है इसीलिए बाल केंद्रित शिक्षा इतना अधिक  महत्व दिया जाता है। 

बाल केंद्रित शिक्षा की अवधारणा / Concept of Child Centered Education

बाल केंद्रित शिक्षा आधुनिक शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है इसके अनुसार अब शिक्षक एक सुविधादाता(Fasilitator) है .जो कि जो कि सिर्फ बच्चों में ज्ञान को भरता नहीं है, बल्कि उनको  सीखने के सुअवसर प्रदान करता है। 

1. शिक्षक केंद्रित शिक्षा में पूरा ध्यान शिक्षक पर ही केंद्रित होता था ,यानी की  शिक्षक  ही  केंद्र होता था परंतु आज वर्तमान समय में बाल केंद्रित शिक्षा में सारा फोकस टीचर पर ना होकर बच्चों पर होता है और उनकी जिंदगी के अनुभव पर होता है जो कि वह अपने आप से ही लेकर आते हैं और उन्हीं अनुभवों से उनको सिखाना होता है यानी की शिक्षा को उनकी  डेली लाइफ से  जोड़कर बच्चों को सिखाना, बच्चों के इंटरेस्ट को ध्यान में रखकर सिलेबस को डिजाइन करना उन्हें उनके  वैयक्तिक अंतर को समझते हुए उन्हें अलग-अलग तरह से समझने के अवसर प्रदान करना। 

2. उनकी मातृभाषा को भाषा सिखाने का एक महत्वपूर्ण औजार मानकर आगे की  दूसरी भाषा सिखाना जिससे कि वह मातृभाषा में तो सीख  ही जाएंगे और दूसरी भाषा में भी आसानी से समझ जाएंगे, इसलिए आजकल पाठ्यक्रम में 2 या 3 भाषाएँ सिखाई जाती हैं।

3.बच्चों को पहले से ही सब कुछ ना बता कर उन्हें अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं करने देना या उनको अपने हिसाब से एक्सपेरिमेंट करने देना और फिर जिससे वह करके सीखने में ज्यादा अच्छे से सीख सकेंगे।

4. पाठ्यक्रम लचीला होना चाहिए जिसमें की समय अनुसार परिवर्तन किया जा सके। 
5. शिक्षा बालक के लिए है बालक शिक्षा के लिए नहीं है इसलिए शिक्षा के उद्देश्य से ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसमें प्रत्येक बालक को विकास के पर्याप्त अवसर मिल सकें। 

बाल केंद्रित शिक्षा में पाठ्यक्रम की भूमिका / Role of Syllabus in Child Centered Education

बाल केंद्रित शिक्षा में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रक्रिया का केंद्र बिंदु माना जाता है. इसीलिए बाल केंद्रित पाठ्यक्रम में बालक की रूचियों,आवश्यकताओं और योग्यताओं के आधार पर ही पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है। 

1.पाठ्यक्रम पूर्व ज्ञान पर आधारित होना चाहिए जिससे कि बच्चे पुराने ज्ञान से नए ज्ञान को जोड़ सकें। 
2.पाठ्यक्रम को जीवन उपयोगी होना सबसे जरूरी है यदि वह जीवन उपयोगी नहीं होगा तो बच्चे उसका उपयोग अपने जीवन में कैसे कर पाएंगे।
3.पाठ्यक्रम वातावरण के अनुसार, समाज की आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए। 
4.पाठ्यक्रम बालक बच्चों के मानसिक स्तर के अनुसार ही होना चाहिए। 
5. पाठ्यक्रम राष्ट्रीय भावना को विकसित करने वाला होना चाहिए।
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