MP TET VARG 3- प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा पार्ट- 2

Concept Of Progressive Education part -2

प्रगतिशील शिक्षा में शिक्षण विधि को अधिक व्यवहारिक (Practical) करने पर जोर दिया जाता है। प्रगतिशील शिक्षा के सिद्धांतों के अनुसार आजकल शिक्षा को अनिवार्य और सार्वभौमिक बनाने पर जोर दिया जाता है। शिक्षा का लक्ष्य व्यक्तित्व का विकास है और प्रत्येक व्यक्ति को उसके व्यक्तित्व का विकास करने के लिए शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। 

प्रगतिशील शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए ही प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण (Globalisation of Primary Education), सर्व शिक्षा अभियान (SSA), मध्यान्ह भोजन योजना (Midday Meal Scheme), शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right To Education) जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये गए। 

प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण (Globalisation of Primary Education) 

सार्वभौमीकरण का अर्थ होता है "सबके लिए उपलब्ध कराना" प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण के अंतर्गत देश के सभी बच्चों के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक "निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा" "Free and Compulsory Education" का प्रावधान करने का उद्देश्य रखा गया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि दिया गया कि इस अनिवार्य शिक्षा के लिए स्कूल बच्चों के घर के पास हो तथा 14 वर्ष तक के बच्चे किसी भी हालत में स्कूल ना छोड़े।

इसके लिए ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, मध्यान भोजन स्कीम, पोषाहार सहायता केंद्र, जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम, सर्व शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, प्राथमिक शिक्षा कोष  आदि प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं। 

सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Adhiyaan) 

प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण से संबंधित यह एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसे "सभी के लिए शिक्षा" "Education For All" अभियान के नाम से भी जाना जाता है। इस अभियान के अंतर्गत "सब पढ़े सब बढ़े " का नारा दिया गया है। सर्व शिक्षा अभियान भारत सरकार द्वारा  सन् 2000- 01 में प्रारंभ किया गया था। 

सर्व शिक्षा अभियान के द्वारा उन बस्तियों में भी नए स्कूल बनाने का प्रयास किया  गया जहां बुनियादी स्कूलों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके अंतर्गत अतिरिक्त कक्षा, पीने का पानी, शौचालय का रखरखाव, स्कूल सुधार तथा अनुदान के माध्यम से वर्तमान स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार करना है। इस अभियान में कंप्यूटर शिक्षा पर भी बल दिया गया इसके अंतर्गत डिजिटल अंतर को समाप्त करने का प्रयास किया गया। बच्चों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए इसी के अंतर्गत मध्यान भोजन जैसी योजना भी शुरू की गई। 

मध्यान्ह भोजन योजना (Mid Day Meal Scheme) -

इस योजना की शुरुआत सर्वप्रथम भारत के तमिलनाडु से प्रारंभ हुई। इसका उद्देश्य सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाना अभियान को सफल बनाना था। प्राथमिक कक्षा में नामांकन वृद्धि  हो तथा स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी हो। इसी को ध्यान में रखकर यह स्कीम शुरू की गई।

इस योजना के अंतर्गत पहली से पांचवी कक्षा तक देश के राजकीय अनुदान प्राप्त प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले सभी बच्चे जो कि 80% उपस्थिति हों, उन्हें प्रतिमाह 3 किलोग्राम गेहूं व चावल दिए जाने की व्यवस्था की गई थी किंतु इस योजना के अंतर्गत छात्रों को दिए जाने वाले खाद्यान्न का पूर्ण लाभ छात्र को ना प्राप्त होकर उसके परिवार को मिल जाता था।

इसलिए 1 सितंबर 2004 से प्राथमिक विद्यालय में पके पकाए भोजन उपलब्ध कराने की योजना आरंभ कर दी गई। इस योजना के अंतर्गत विद्यालयों में मध्य अवकाश में छात्र -छात्राओं को सप्ताह में 4 दिन चावल से बने पदार्थ तथा 2 दिन गेहूं से बने भोज्य पदार्थ दिए जाने की व्यवस्था की गई। प्रत्येक छात्र -छात्रा को प्रतिदिन 100 ग्राम खाद्यान्न से निर्मित सामग्री दिए जाने का प्रावधान था, जिसे पकाने के लिए परिवर्तन लागत की व्यवस्था भी की गई। 

इसके बाद पौष्टिकता सुनिश्चित करने के लिए यह तय किया गया कि भोजन कम से कम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन वाला हो। भोजन पकाने का कार्य ग्राम पंचायतों की देखरेख में किया जाता है और यह भोजन वर्ष में कम से कम 200 दिनों तक उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.