चुंबक, धातु होता है या पत्थर, Magnet नाम कैसे पड़ा- GK in Hindi

इंजीनियरिंग के चमत्कारी प्रोडक्ट इलेक्ट्रोमैग्नेट के कारण प्राकृतिक चुंबक अपनी पहचान खो गया है लेकिन यदि प्राकृतिक चुंबक ना होता तो इलेक्ट्रोमैग्नेट का आईडिया ही नहीं आता। प्राकृतिक चुंबक आज भी अपना महत्व रखता है और दुनिया में कुछ काम उसके बिना नहीं हो सकते। और यह पता लगाते हैं कि प्राकृतिक चुंबक (जिससे लोहा चिपक जाता है) धातु है अथवा कोई पत्थर। सबसे पहले यह कहां मिला था। 

चुंबक, धातु है या पत्थर

चुंबक एक ऐसी वस्तु है जो लोहे को आकर्षित करती है। चुंबक का यही गुण उसे स्पेशल बनाता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि चुंबक एक धातु है परंतु आश्चर्यजनक बात है कि चुंबक एक पत्थर है इसे LOAD STONE कहा जाता है। इस पत्थर की खदान सबसे पहले एशिया के मैग्नीशिया शहर में पाई गई थी। मैग्नीशिया शहर के कारण चुंबक का नाम मैग्नेट रखा गया। मजेदार बात यह है कि मैग्नेट्स का पहला नाम नहीं है बल्कि सबसे पहले इसे मैग्नेटाइट कहा जाता था। 

चुंबक की कहानी- किसने खोज की और गुणों का पता कब चला 

चुंबक की खोज आज से करीब 4000 साल पहले नॉर्थ ग्रीस के एक चरवाहे द्वारा की गई थी। उसके जूतों के सोल में लोहे की कील लगी थी। उसने देखा कि कीलों से कुछ पत्थर चिपक गए हैं। आसपास कुछ बड़े पत्थर भी मिल गए। ग्रीस के लोगों ने चिपकने वाले पत्थर को मैग्नेटाइट नाम दिया। माना गया कि यह देवता का पत्थर है जो बुरी आत्माओं, नेगेटिव एनर्जी और लाइलाज बीमारियों को दूर करने के लिए बनाया गया है। 2500 साल तक दुनिया को चुंबक के गुणों के बारे में पता ही नहीं चला। इसे देवता का पत्थर मानकर झाड़-फूंक के लिए उपयोग किया जाता रहा।

सन 1600 में इंग्लैण्ड के विलियम गिलबर्ट (1544-1603) ने पहली बार चुंबक के गुणों के बारे में दुनिया को बताया। उन्होंने करीब 17 साल तक प्राकृतिक चुंबक पर अध्ययन किया और उसके बाद इसके बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी बताया कि करोड़ों साल पहले पृथ्वी एक चुंबक थी। इसके बाद विलियम गिलबर्ट पूरी दुनिया में फेमस हो गए और 1603 में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु का कारण आज तक अज्ञात है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 
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