औषधीय पौधे जो वायरस और विकार से बचाते हैं, GWALIOR नर्सरी में डिमांड बढ़ी

ग्वालियर।
शहर में एक बार फिर आयुर्वेद का डंका बजने लगा है। तीसरी लहर से बचने के लिए लोग औषधीय पौधे खरीदने हैं। शहर की तमाम नर्सरी में औषधीय पौधों की डिमांड बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि दूसरी लहर के समय इसी प्रकार के औषधीय पौधों ने जान बचाई थी। दावा किया जाता है कि इनके प्रयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और वायरस का हमला होने पर भी संक्रमण नहीं फैलता। 

कौन-कौन से पौधे खरीद रहे हैं लोग

तुलसी- क्योंकि इसमें एंटीबायोटिक सहित कई गुण होते हैं। लोग देसी काढ़े में तुलसी के पत्तों का उपयोग करते हैं।
गिलोय- दावा किया जाता है कि इससे शरीर की इम्युनिटी बढ़ जाती है। जो शरीर को संक्रमित होने से बचाती है।
बोवई- यह तुलसी की प्रजाति का पौधा है। यह दो फ्लेवर (सौंफ और लोंग) में आता है। 

दमा बेल- ये दमा के रोगों के लिए लाभदायक है और गले से सूखे कफ को साफ करती है।
गुग्गल- ये शरीर में वात और पित्त खत्म करता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
चित्रक- इसके सेवन से पाचन तंत्र में सुधार होता है।
कालमेघ- इसका काढ़ा बनाकर पीने से बुखार खत्म हो जाता है।
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