MP TET VARG-3 TOPIC- समाजीकरण प्रक्रियाएं पार्ट - 2

अरस्तु के अनुसार "मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है" समाजीकरण की प्रक्रिया के बिना मनुष्य सामाजिक प्राणी नहीं बन सकता और समाजीकरण का कार्य समाज में रहकर ही संभव है। समाज से अलग रहकर समाजीकरण नहीं हो सकता। 

समाजीकरण को प्रभावित करने वाले कारक

समाजीकरण को प्रभावित करने वाले कारकों में कुछ कारक ऐसे होते हैं जो सीधे प्रभाव डालते हैं इन्हें सक्रिय कारक (Active agents) कहा जाता है जबकि कुछ कारक ऐसे ऐसे होते हैं जो अपना प्रभाव सीधे नहीं डालते, उन्हें निष्क्रिय कारक (Passive agents) कहा जाता है। 

मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा- एमपी टेट वर्ग 3 का सिलेबस के अनुसार - एक बच्चे के सामाजीकरण की प्रक्रिया में अभिभावक, शिक्षक और साथी की भूमिका में के बारे में अध्ययन करना जरूरी है। 

बच्चे के सामाजीकरण में अभिभावकों की भूमिका- Role of Parents in the socialization of Children

एक बच्चा जैसे ही जन्म लेता है तो जन्म के तुरंत बाद ही उसका सामाजीकरण होना शुरू हो जाता है। सबसे पहले वह जिस परिवार में जन्म लेता है, उस परिवार का सदस्य बनता है और है और उसका सबसे ज्यादा घनिष्ठ संबंध उसका अपनी मां से होता है। इसी कारण मां को प्रथम शिक्षक और परिवार को प्रथम पाठशाला कहा जाता है। 

समाजीकरण करने वाली संस्था के रूप में परिवार एवं माता पिता का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। कहा जाता है की मां के त्याग और पिता की सुरक्षा में रहते हुए बच्चा जो कुछ सीखता है, वह उसके जीवन की स्थाई पूंजी होती है। परिवार का आकार यानी न्यूक्लियर फैमिली और ज्वाइंट फैमिली भी बच्चे की समाजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। 

बच्चे के समाजीकरण में शिक्षक की भूमिका- Role of teachers in the Socialization of children

आपने अक्सर छोटे बच्चों को ऐसा बोलते सुना होगा कि "हमारी मैडम ने तो ऐसा कहा है, हम तो यही करेंगे"। एक बच्चा जैसे ही थोड़ा बड़ा होता है, वह स्कूल जाना शुरू कर कर कर देता है। परिवार के बाद बच्चों को विद्यालय में प्रवेश मिलता है और शिक्षक का व्यवहार, आचरण सब कुछ बच्चे को प्रभावित करता है। समाजीकरण के मामले में बच्चे अपने अभिभावकों और शिक्षकों का ही अनुकरण करते हैं। बालकों के सही दिशा में सामाजीकरण हेतु शिक्षक को चाहिए कि वह उनके साथ स्नेह एवं सहानुभूति पूर्ण बर्ताव करें। समाजीकरण की प्रक्रिया को सही गति और दिशा देना शिक्षक का ही काम है। इसके अलावा विद्यालय का वातावरण, पाठ्यक्रम, सहपाठी सभी कुछ बच्चे के समाजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

बच्चे के समाजीकरण की प्रक्रिया में साथियों की भूमिका- Role of Peer Groups in the Socialization of Children 

कहा जाता है की संगत का असर, व्यक्ति पर हमेशा रहता है। एक बच्चा जब अपने पास-पड़ोस में जाता है और विद्यालय में जाता है, तो उसके मित्र भी बनते हैं। उसके साथी या सहपाठियों  का प्रभाव भी उसकी सामाजीकरण की प्रक्रिया पर पड़ता है। अपने मित्रों के साथ रहने के लिए, उनकी तरह दिखने के लिये, उनका अनुकरण करता है। विशेष रुप से उत्तर बाल्यावस्था (Late Childhood) जिसे प्री गैंग स्टेज (Pre gang stage) भी कहते हैं। वह अपने समूह या टोली में रहना ही अधिक पसंद करता है और किशोरावस्था (Adolscence)  में तो वह अपने साथी समूह (Peer Group) का हिस्सा बनने के लिए ऐसा हर काम करता है जो उसके साथी करते हैं। इसके अलावा खेल, धर्म, जाति ये सब भी समाजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.


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