मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों का निजीकरण शुरू: शासकीय अध्यापक संगठन- MP NEWS

भोपाल
। मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों का निजी करण शुरू कर दिया गया है। तीव्र विरोध ना हो इसलिए इसे PPP मोड में एक धीमी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। यह दावा शासकीय अध्यापक संगठन द्वारा किया गया है। मध्य प्रदेश में जिस प्रकार राज्य परिवहन विभाग, एमपीईबी विभागों का निजीकरण किया गया है, अब उसी तर्ज पर शिक्षा विभाग का भी निजीकरण (Privatization) किए जाने की शुरुआत हो चुकी है। 2020 में आई नई शिक्षा नीति में शिक्षा को सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब शिक्षा का बाजारीकरण होगा।

वर्तमान में सरकार ने 53 जिलों में पतंजलि विद्यापीठ को सरकारी स्कूलों की बागडोर पीपीपी मोड पर देकर शिक्षा के निजीकरण की शुरुआत कर दी है। यह जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश शासकीय अध्यापक संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पृथ्वी सिंह रघुवंशी ने बताया कि सरकार ने बड़ी ही चालाकी से शिक्षा के निजीकरण के विरुद्ध अध्यापकों- शिक्षकों को लामबंद नहीं होने दिया। इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में शिक्षा का निजीकरण तेजी से किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश के कई स्कूलों को सरकार किसी संस्था या व्यक्तियों को सौंप देगी। शिक्षकों, अध्यापकों को वेतन तो सरकार ही देगी, लेकिन देखरेख व अन्य व्यवस्थाएं संबंधित संस्था या व्यक्ति ही करेगा।

यह योजना अध्यापकों के लिए आत्मघाती होगी, उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इसके बारे में नहीं सोचा गया तो मध्य प्रदेश राज्य परिवहन विभाग,एमपीईबी की तरह ही शिक्षा विभाग भी बर्बाद हो जाएगा. इसलिए शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थी तीनों को ध्यान में रखकर उनके हितों की रक्षा के लिए एक समग्र कार्यक्रम बनाकर संगठनों को आगे बढ़ाया जाए. तभी इस दलदल से निकला जा सकता है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें.


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