GWALIOR NEWS- सीएमओ के प्रभार में करोड़ों कमाए, EOW का छापा

ग्वालियर
। थाटीपुर ग्वालियर में तीन मंजिला आलीशान मकान में रहने वाले महेश दीक्षित के यहां EOW की टीम ने छापामार कार्रवाई की। टीम ने दावा किया है कि श्री दीक्षित के पास से करोड़ों रुपए की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। महेश दीक्षित नगर पालिका अशोकनगर में अकाउंटेंट के पद पर पदस्थ हैं परंतु उनकी ज्यादातर नौकरी विभिन्न नगर पालिकाओं में प्रभारी सीएमओ के पद पर बीती है। 

प्रभारी सीएमओ महेश दीक्षित के यहां EOW को क्या-क्या मिला 

- थाटीपुर के सुरेश नगर एक करोड़ रुपए से अधिक का आलीशान तीन मंजिला मकान
- ग्वालियर-भिंड सीमा पर सेंथरी गांव में 7 बीघा से ज्यादा खेती की जमीन
- सेंथरी गांव में ढाई बीघा से ज्यादा जमीन
- सेंथरी गांव छह बीघा से ज्यादा खेती की जमीन
- सेंथरी गांव में पांच बीघा जमीन पत्नी के नाम पर
- सेंथरी गांव में छह बीघा से ज्यादा खेती की जमीन
- सेंथरी गांव में साढ़े पांच बीघा खेती की जमीन परिवार के नाम पर
- सेंथरी गांव में ढाई बीघा खेती के लिए जमीन
- सेंथरी गांव में सवा बीघा खेती की जमीन पुश्तैनी बताई गई
- सेंथरी गांव में सवा बीघा जमीन कृषि उपयोग की मिली है

950 रुपए मासिक वेतन पर नौकरी लगी थी

महेश दीक्षित ने 1990 में मात्र 950 रुपए मासिक वेतन से नौकरी शुरू की थी और 31 साल की नौकरी में उनकी कुल आय लगभग ₹50 लाख होती है। इसमें 31 साल का घर खर्च और बाकी खर्चे भी किए जाने थे। इस सब के बावजूद महेश दीक्षित के पास से लगभग ₹5 करोड़ की संपत्ति, आभूषण एवं नदी मिलने की संभावना है। EOW टीम की कार्रवाई जारी है। 

प्रभारी की परंपरा के कारण भ्रष्टाचार बढ़ा 

एडवोकेट शैलेंद्र चौधरी का कहना है कि मध्यप्रदेश में प्रभारी की परंपरा के कारण भ्रष्टाचार बढ़ा है। प्रभारी को पता होता है कि वह इस पद पर सीमित समय के लिए है। उसे पद की जिम्मेदारियों का ज्ञान नहीं होता। वह पद का खुलकर दुरुपयोग करता है। कुछ मामलों में तो प्रभारी का पद ठेके पर दिए जाने का खुलासा भी हुआ है। महेश दीक्षित के केस में यह जांच करना भी जरूरी है कि वह कौन है जिसने महेश दीक्षित को बार-बार प्रभारी सीएमओ बनाया।


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