Learning management- ऐसे होते हैं, करिश्माई लोग जो कहीं भी सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बन जाते हैं

शक्ति रावत।
यकीनन आपके आसपास भी एक-दो ऐसे लोग होंगे जो जब कहीं भी पंहुचते हैं, तो बरबस ही सबका ध्यान उनकी तरफ चला जाता है। ये लोग आसानी से कहीं भी अपने लिए जगह बना लेते हैं, और किसी के भी साथ आसानी से घुलमिल जाते हैं। लर्निंग मैनेजमेंट में इन्हें करिश्माई लोग कहा जाता है। जो कहीं भी सेंटर ऑफ अट्रेक्शन बन जाते हैं, आप भी कभी ना कभी उनकी तरह बनने की सोचते तो हैं, लेकिन कैसे इसका जबाब कई बार नहीं मिलता। तो आईये आज लर्निंग मैनेजमेंट के इसी चैप्टर की बात करते हैं, इसके लिए आपको बस कुछ आदतों को अपनी पर्सनेलिटी में शामिल करना है। जो बहुत मुश्किल नहीं है, लेकिन इनका असर करिश्माई है। जानिये क्या करते करिश्माई लोग।

1- सेल्फ कॉन्फिडेेंट-

सबसे पहला गुण इनसे सीखने जैसा है, वह है आत्म विश्वास। ये आत्मविश्वासी होते हैं।उनमें झिझक नहीं होती, वे जानते हैं, लोगों से कैसे लगातार बात करनी है। अजनबी से बात करने या पूछने में संकोच नहीं करते। जबकि ज्यादातर लोग इस मामले में संकोची होते हैं। आत्मविश्वास के साथ ही अपनी बात को स्पष्ट और सही तरीके से रखने की क्षमता इनमें होती है।

2- बॉडी लेंग्वेज की जानकारी-

ऐसे लोगों को बॉडी लेंग्वेज की अच्छी जानकारी होती है। समझो आप किसी से पूछते हैं, कि आप कैसे हैं, जबाब में सामने वाला कहता है ठीक हैं। लेकिन तब गौर से देखिये क्या उसकी बॉडी लेंग्वेज उसके कहे गए शब्दों से मेल खा रही है या नहीं। करिश्माई लोग इस पर ध्यान देते हैं। इतना ही नहीं अगर आपका कोई दोस्त दुखी है, तो कब उसके कंधे पर हाथ रखने की जरूरत है, और कब उसे गले लगाना है, यह भी अच्छी तरह जानते हैं। यानि संबधों में फिजिकल कॉन्टेक्ट को नजरअंदाज नहीं करते। जबकि अन्य लोग संकोच कर जाते हैं।

3- ह्यूमर-

करिश्माई लोगों का ह्यूमर कमाल का होता है, कब कहां क्या बोलना या कहां चुप रह जाना वे जानते हैं, कब जोक सुनाने की जरूरत है, और कब किसी को तसल्ली देनी है, इतना ही नहीं वे जानते हैं, किसी को सलाह देने की सही जगह और वक्त क्या है। जबकि दूसरे लोग बिना मौके को भांपे कहीं भी शुरू हो जाते हैं।

4- संबध बनाना-

किसी नये व्यक्ति से मेलजोल बढ़ाने में हम सभी को हिचक होती है, पर इनके साथ ऐसा नहीं है, ये शब्दों और सवाल पूछने की ताकत को जानते हैं। नये व्यक्ति से सवाल पूछकर ही ये उसके बारे में जानकारी जुटाते हैं। इससे इन्हें यह भी पता चल जाता है कि सामने वाले की कौन-कौन सी बातेें हमसे मेल खाती हैं।

दरअसल सवाल पूछने से बातचीत का सिलसिला शुरू होता है। इससे दो लोगों के बीच में संबध मजबूत होते हैं। इतना ही नहीं ये ज्यादा से ज्यादा लोगों के नाम याद रखते हैं, क्योंकि बातचीत के समय जब आप किसी का नाम लेकर बात करते हैं, तो आपको सहज ही अंटेशन मिल जाता है। -लेखक मोटीवेशनल स्पीकर, पॉडकास्टर और लाइफ मैनेजमेंट गुरू हैं। 


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