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MP मंत्री के जवाब से विधायक चकरघिन्नी, विधानसभा में बहस टालने का नया तरीका - Madhya pradesh news

भोपाल
। इन दिनों इनोवेशन हर फील्ड में हो रहे हैं। विधानसभा में भी ऐसा ही कुछ दिखाई दिया। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने इस सवाल पर मंगलवार को बहस होनी थी, उसका जवाब सोमवार रात 10:00 बजे भेजा। जवाब में कागजों की संख्या कितनी थी, सवाल करने वाले विधायक भी नहीं बता पाए लेकिन जवाब के साथ है कागजों का वजन 15 किलो है। 

मंगलवार को बहस होनी थी, सोमवार रात 10:00 बजे जवाब दिया

इंदौर-उज्जैन संभाग की सड़कों को लेकर मंदसौर से बीजेपी विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने विधानसभा में सवाल लगाया था। लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने इसका लिखित जवाब सिसोदिया को भेज दिया। जवाब इतने पेज में थे कि उनका वजन ही करीब 15 किलो था। चूंकि विधानसभा की प्रश्नोत्तर सूची में यह सवाल 20वें नंबर पर था। इसलिए इस पर मंगलवार को सदन में चर्चा होना थी। सिसोदिया को सोमवार रात 10 बजे जवाब के बंडल उनके घर पहुंचाए गए।

क्या सवाल किया था विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने

बस में लगाने वाले विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि 15 किलो के जवाब का अध्ययन एक रात में कैसे करता? अब अध्ययन के बाद अगले सत्र में प्रतिप्रश्न लगाया जाएगा। विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने पूछा था कि इंदौर-उज्जैन संभाग में पीडब्ल्यूडी कुल कितनी टोल रोड पर कितने समय से टोल टैक्स वसूल रहा है? 1 जनवरी 2015 से अब तक (प्रश्न लगाने वाले दिन तक) सड़कों के खराब होने की कितनी शिकायतें हैं? इन सड़कों का ऑडिट कब-कब कराया गया? इन सड़कों के निर्माण में पिछले 10 साल में कितनी राशि खर्च की गई?

भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने प्रश्न क्यों लगाया

दरअसल, नीमच के नयागांव से धार के लेबड़ तक 260 किलोमीटर की सड़क पर करीब 12 सड़क खराब होने के कारण एक्सीडेंट हो रहे हैं। सिसोदिया ने कहा कि इन सड़कों पर 5 टोल नाके हैं, जहां रोजना 25 से 30 लाख रुपए का टैक्स कलेक्शन होता है। बाबजूद इसके सड़क की मरम्मत नहीं हुई।

विधायकों की कमेटी की सिफारिश में सरकार ने नहीं मानी

सिसोदिया ने बताया कि वर्ष 2010 में इस सड़क निरीक्षण करने के लिए विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी (अब दिवंगत) ने मेरी अध्यक्षता में 9 विधायकों की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने इस सड़क का निरीक्षण करने के बाद एक रिपोर्ट भी विधानसभा की तरफ से सरकार को सौंपी गई थी। बावजूद इसके इस सड़क पर एक्सीडेंट होना कम नहीं हुए।

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