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गरीब सवर्णों को आरक्षण में आयुसीमा छूट मामले पर लोकसभा में केंद्र सरकार का उत्तर

EWS reservation news: Parliament question answer

नई दिल्ली। भारत में अनारक्षित जातियों के गरीबों को सरकारी नौकरी एवं शैक्षणिक संस्थाओं में 10% आरक्षण तो दे दिया गया लेकिन केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग की तरह आयु सीमा और फीस में किसी भी प्रकार की छूट देने से इंकार कर दिया।

सरकार ने ऐसी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि आयु सीमा में ढील और प्रयासों की संख्या में छूट उन मामलों में एक विशेष व्यवस्था के तहत दी जाती है, जब मांग के मुताबिक पात्र व्यक्ति इस व्यवस्था के तहत उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने पिछले दिनों संसद को यह जानकारी दी। साथ ही बताया कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछडे़ वर्ग में अभी पात्र व्यक्तियों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में EWS को इस तरह की कोई छूट प्रदान नहीं की जा सकती है।

कार्मिक मंत्रालय को लिखा गया था सिफारिशी पत्र

खास बात यह है कि मंत्रालय ने संसद को यह जानकारी तब दी, जब इससे पहले वह इसे लेकर कार्मिक मंत्रालय को एक सिफारिशी पत्र लिख चुका था। पत्र में कहा गया था कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ों को भी आरक्षण प्राप्त दूसरे वर्गों की तरह आयु सीमा और फीस आदि में छूट प्रदान की जाए। इसके साथ ही संसद में ही कई सदस्यों की ओर से भी इसकी मांग की गई थी। 

गौरतलब है कि देशभर में चली एक बड़े आंदोलन के बाद सरकार ने फरवरी 2019 में संविधान संशोधन के जरिये सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दस फीसद आरक्षण देने का फैसला किया था। तभी से यह छूट देने की मांग भी की जा रही है।

एससी-एसटी और ओबीसी को मिली है छूट

मौजूदा समय में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के आधार पर जिन्हें उम्र की छूट है, उनमें एससी-एसटी को पांच साल और ओबीसी को तीन साल की छूट है। इसी तरह आरक्षण प्राप्त करने वाले इन दोनों ही वर्गों को शैक्षणिक संस्थानों की फीस और नौकरियों को लेकर किए जाने वाले आवेदन की फीस में भी छूट प्राप्त है।

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