EPFO ने KYC के नाम पर एक करोड़ कर्मचारियों का ब्याज भुगतान रोका - employee news

Updesh Awasthee
नई दिल्ली।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने भारत के करीब एक करोड़ कर्मचारियों का ब्याज भुगतान रोक लिया है। EPFO का कहना है कि KYC के कारण ब्याज का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि एंपलॉयर और एम्पलाई द्वारा दी गई जानकारी मैच नहीं कर रही है। इस कारण से 31 दिसंबर 2020 तक दिया जाने वाला ब्याज का भुगतान 18 फरवरी 2021 तक नहीं किया गया। सवाल सिर्फ इतना सा है कि यदि KYC में कोई कंफ्यूजन था तो क्या EPFO ने संबंधित कर्मचारी को इसके बारे में सूचित किया या फिर ब्याज का भुगतान रोकने के लिए बहानेबाजी है।

EPFO में एक करोड़ कर्मचारियों का ब्याज अटका हुआ है

EPFO ने साल 2019-20 के लिए 8.5% ब्याज इस साल की शुरुआत से देना शुरू किया था। अब तक करीब 5 करोड़ खातों में ब्याज की राशि पहुंचा दी गई है। EPFO के पास कुल 6 करोड़ सब्सक्राइबर हैं। आम तौर पर ब्याज के भुगतान की प्रक्रिया 1 से 2 सप्ताह में पूरी हो जाती है।

एक कर्मचारी की जानकारी गलत तो EPFO सभी कर्मचारियों का भुगतान रोक देता है

EPFO संस्थागत रूप से ब्याज का भुगतान करता है न कि इंडिविजुअल पर्सन के आधार पर। अगर संस्था के एक भी कर्मचारी की जानकारी सही नहीं पाई जाती है तो पूरी संस्था के कर्मचारियों को ब्याज के भुगतान में देरी होती है। इस साल कई संस्थाओं को इसी चलते भुगतान में समय लग रहा है।

31 दिसंबर तक करना था ब्याज का भुगतान

सरकार ने सितंबर में दो किस्तों में ब्याज का भुगतान करने की बात कही थी। पहली किस्त के तहत 8.15% ब्याज दिया जाना था। बाकी का 0.35% ब्याज 31 दिसंबर 2020 तक दिया जाना था।

ब्याज दर 7 सालों में सबसे कम फिर भी देने में देरी

EPF पर वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 8.50% ब्याज तय किया गया है। जो बीते 7 सालों में सबसे कम है। वित्त वर्ष 2018-19 में EPF या PF पर 8.65% ब्याज दिया गया था। 

किस साल कितना ब्याज मिला...

वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 में 8.75% रहा था।
वित्त वर्ष 2015-16 के लिए यह 8.80% था।
वित्त वर्ष 2016-17 के लिए ब्याज दर 8.65% था।
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 8.55% रहा था।
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 8.65% रहा था।

जमा पर मिलता है सालाना ब्याज

नियमों के मुताबिक, सैलरी पाने वाले लोगों को अपने वेतन और महंगाई भत्ते की 12% रकम PF खाते में योगदान करना अनिवार्य होता है। नियोक्ता भी कर्मचारी के PF अकाउंट में इतना ही योगदान देता है। हालांकि, कंपनी का हिस्सा दो हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें से 8.33% पेंशन स्कीम में जाता है। वहीं, बाकी हिस्सा PF खाते में जाता है। PF अकाउंट में योगदान किए गए अंश पर कम्पाउंडिंग के आधार पर सालाना ब्याज मिलता है।

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