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कलेक्टर वर्मा की बुद्धि पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने 10000 का अर्थदंड लगाया - MP NEWS

ग्वालियर
। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर श्री अनुराग वर्मा की बौद्धिक योग्यता पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है। श्री अनुराग वर्मा दिनांक 2 दिसंबर 2020 को मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के कलेक्टर थे। उन्होंने दूध में मिलावट करने वाले व्यापारी अवधेश शर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई का आदेश जारी किया था। इसी आदेश को निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने श्री अनुराग वर्मा के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए ₹10000 का अर्थदंड लगाया है।

दूध कारोबारी अवधेश शर्मा के खिलाफ रासुका की कार्रवाई की थी

मुरैना जिला प्रशासन ने मिलावटी दूध बेचने के आरोप में अवधेश शर्मा को 1 दिसम्बर 2020 को गिरफ्तार किया था। कलेक्टर ने गिरफ्तारी के दूसरे दिन दिनांक 2 दिसंबर 2020 को आरोपी अवधेश शर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए थे। दूध कारोबारी ने कलेक्टर द्वारा जारी किए गए रासुका के आदेश को हाई कोर्ट में चैलेंज किया था। 

मुरैना के दूध व्यापारी अवधेश शर्मा के खिलाफ रासुका की कार्रवाई का आदेश निरस्त

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने कलेक्टर द्वारा जारी किए गए रासुका के आदेश को नियमविरुद्ध मानते हुए अवधेश शर्मा पर लगा NSA तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ऐसा लगता है जैसे जिला प्रशासन की कार्रवाई द्वेष पूर्ण है। जस्टिस शील नागू और जस्टिस आनंद पाठक की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, ''जेल में बंद व्यक्ति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्रवाई करना निजी स्वतंत्रता के मूलभूत अधिकार का हनन करने जैसा है. ऐसा प्रतीत होता है कि रासुका लगाते समय बुद्धि का प्रयोग नहीं किया गया।'' कोर्ट ने शासन और मुरैना कलेक्टर को 30 दिन के भीतर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भरने का आदेश दिया। यह राशि याचिकाकर्ता को दी जाएगी।

रासुका का आदेश निरस्त किए जाने का आधार क्या है

आरोपित को इसकी जानकारी पांच दिनों के अंदर दी जानी चाहिए थी, लेकिन उसे पांच दिन बाद इसकी जानकारी दी गई। कलेक्टर ने आरोपित पर लगाई गई रासुका के आदेश में गिरफ्तारी का जिक्र नहीं किया। इसके अलावा केंद्र सरकार से अप्रूवल नहीं लिया गया। इस तरह कलेक्टर ने रासुका लगाने में नियमों का पालन नहीं किया। मौके से जो मिलावटी पदार्थ बरामद किए थे, इसकी प्रशासन ने लैब में जांच कराई। सरकारी जांच के दौरान ये रसायन मानव जीनव के लिए घातक नहीं पाए गए हैं। सिर्फ घटिया किस्म के पाए गए थे। याचिकाकर्ता व शासन का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि कलेक्टर द्वारा जारी किया गया रासुका का आदेश, मौलिक अधिकारों का हनन है। रासुका लगाने में नियमों का पालन नहीं किया गया है। 

क्या है रासुका लगाने का नियम?

रासुका के सेक्शन 8 में संबंधित व्यक्ति को उसके खिलाफ की गई कार्रवाई का आधार बताना होता है। अवधेश शर्मा के मामले में इस प्रक्रिया की अनदेखी की गई। रासुका की कार्रवाई की पुष्टि के लिए जिले से राज्य को और वहां से केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाता है। केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद रासुका की कार्रवाई को वैध माना जाता है. मुरैना प्रशासन ने इस प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया।

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