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मध्य प्रदेश वन विभाग में बैंक चेक घोटाला: 9 बड़े अधिकारियों के खिलाफ FIR के निर्देश - MP NEWS

भोपाल
। वन विभाग में बड़े स्तर के घोटाले का खुलासा हुआ है। इसे मध्य प्रदेश वन विभाग का बैंक चेक घोटाला कहा जाएगा क्योंकि चेक पेमेंट के समय जानबूझकर कुछ इस तरह की साजिश रची गई की ₹10000 के चेक पर ₹110000 का भुगतान हुआ। डिपार्टमेंटल इंक्वायरी के बाद भारतीय वन सेवा 1999 बेच के सीनियर अफसर आरएस सिकरवार को सस्पेंड कर दिया गया और अब सिकरवार सहित 9 बड़े अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

450 बैंक चेकों में कूट रचना पाई गई

शासन ने लघु वनोपज संघ के MD एसएसएस राजपूत के साथ उमरिया CCF को इस बारे में कह दिया है। सिकरवार के साथ उमरिया में पिछले छह साल में पदस्थ रहे 8 और DFO (रिटायर व तत्कालीन) को चार्जशीट भी जारी की जाएगी। इन सभी के कार्यकाल में तकरीबन 450 से अधिक बैंकर्स चैक जारी हुए, जिसमें अंकों व शब्दों का फर्जीवाड़ा करके साढ़े सात करोड़ रुपए सरकार के खाते से निकाल लिए गए। रिटायर और वर्तमान अफसरों पर कार्रवाई के साथ ही शासन स्तर से अब यह पड़ताल भी की जाएगी कि बैंकों के अधिकारियों और ऑडिटर की मिलीभगत तो नहीं रही।

यदि कैशियर का निधन नहीं होता तो घोटाला भी नहीं पता चलता

लघुवनोपज संघ और PCCF (हॉफ) की ओर से जांच के लिए भेजे गए दो एकाउंटेंट ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। अब बैंक वालों और ऑडिटर से भी पूछताछ होगी। वन विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह अपनी तरह का नया घोटाला है। यदि उमरिया के कैशियर कमलेश द्विवेदी का निधन नहीं होता तो यह केस भी नहीं खुलता।

IFS आरएस सिकरवार के खिलाफ रिटायरमेंट से पहले FIR की तैयारी

सिकरवार के समय ही डेढ़ करोड़ रुपए अधिक निकाले गए। भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आरएस सिकरवार 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं, इसलिए FIR की कार्रवाई तेजी से होगी। पूर्व में पदस्थ रहे जो अधिकारी सेवा में उन्हें चार्जशीट जारी होगी। जो रिटायर हो चुके हैं, उन्हें चार्जशीट जारी करने का फैसला कैबिनेट लेगी।

मध्य प्रदेश वन विभाग में बैंक चेक घोटाला कैसे किया गया

किसी भी काम का चैक बनाया जाता। राशि के आगे थोड़ी जगह छोड़ी और शब्दों में राशि लिखते समय भी आगे थोड़ी जगह छोड़ी। चैक पर हस्ताक्षर की अथॉरिटी वन संरक्षक होता है। चैक उसके पास जाते ही साइन हो जाते थे। इसके बाद इसमें नंबर व शब्द बढ़ाए जाते थे। हजार का लाख हो जाता था। पत्रकारों तक पहुंचे दो चैक में 47300 रुपए के आगे 5 लगाकर भुगतान 547300 रुपए निकाल लिया क्या। इसी तरह 56506 के आगे 3 लिखकर भुगतान 356506 रुपए निकाला गया।

2016 से अब तक रहे अफसर

टीएस चतुर्वेदी, एमएल लाडिया, देवांशू शेखर, रिपुदमन सिंह, डीएस कनेश, बासू कन्नौजिया, प्रदीप मिश्रा, एमएस भगदिया और आरएस सिकरवार।

सरकारी पैसे निकालने का प्रोटोकॉल जो फाॅलो नहीं हुआ

साइनिंग अथॉरिटी के द्वारा चैक जारी करने के बाद हर माह के अंत में बैंक से भुगतान को री-चैकिंग करना होता है। उमरिया में पिछले छह साल में ऐसी कोई चैकिंग नहीं की गई। हर साल ऑडिट होता है, लेकिन गड़बड़ी नहीं पकड़ी गई। इसीलिए संदेह बैंक अधिकारियों और ऑडिटर पर किया जा रहा है।

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