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दीपावली पर पटाखे चलाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूली जाए: जनहित याचिका - MP NEWS

जबलपुर
। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद दीपावली के अवसर पर जबलपुर में पटाखे चलाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूली के लिए जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि दीपावली के पटाखों से न केवल प्रदूषण बढ़ा बल्कि कोरोनावायरस का संक्रमण भी बढ़ गया।

दीपावली के पटाखों के प्रदूषण से कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ा है

डॉ. पीजी नाजपांडे ने दिल्ली जैसी स्थिति जबलपुर में न बने इसके लिए आवाज़ उठाई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में एक नई जनहित याचिका दायर की गई है। इसके जरिये दीपावली में फूटे पटाखों से फैले प्रदूषण को कठघरे में रखा गया है। साथ ही दावा किया गया है कि इस प्रदूषण की वजह से कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे में प्रदूषकों से क्षतिपूर्ति वसूली जानी चाहिए। 

NGT के आदेश की अवमानना हुई है, स्वत: संज्ञान ले

जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे का यह भी आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पटाखों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई संभव नहीं हो सकी। बावजूद इसके कि एनजीटी स्पष्ट आदेश पारित कर चुका था। इस दृष्टि से मामला सीधेतौर पर एनजीटी की अवमानना का है। एनजीटी को चाहिए कि वह स्वत: संज्ञान के जरिये अवमानना प्रकरण दर्ज करे।

दीपावली की आतिशबाजी को लेकर एनजीटी का आदेश

एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि जिन शहरों में एअर क्वालिटी इंडैक्स 200 से ऊपर हो, वे पुअर की श्रेणी में आएंगे। लिहाजा, वहां पटाखों को प्रतिबंधित किया जाए। जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर, भोपाल सहित कुछ अन्य शहर पुअर श्रेणी में थे, इसके बावजूद यहां पटाखे फूटने दिए गए। इससे हवा बुरी तरह खराब हो गई। 

पटाखों पर प्रतिबंध लगाया होता तो कोरोना वायरस ना फैलता

दूसरे जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर के सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव व अधिवक्ता प्रभात यादव का आरोप है कि आशंका को हल्के में लेने के कारण मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में कोरोना के केस तेजी से बढ़े। नतीजा यह हुआ कि रात का कर्फ्यू लगाने की स्थिति निर्मित हो गई। यदि पटाखों को प्रतिबंधित कर दिया गया होता, तो कोरोना का संक्रमण इस तरह न फैलता। जबलपुर में भी एअर क्वालिटी इंडेक्स 200 से ऊपर गया, अतः सावधानी आवश्यक है।

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