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Gmail में प्रतिलिपि के लिए Cc उपलब्ध है तो फिर Bcc का विकल्प क्यों होता है, क्या यह गैरकानूनी नहीं है / GK IN HINDI

भारत में इन दिनों करीब 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स है। यह सही है कि इनमें से 25% ऐसे हैं जिनके लिए इंटरनेट का मतलब सोशल मीडिया होता है परंतु 25% ऐसे हैं जो नियमित रूप से जीमेल का उपयोग करते हैं और शेष 50% ऐसे हैं जो कभी-कभी लेकिन ईमेल का उपयोग करते हैं। आपने ध्यान दिया होगा जब हम ईमेल कंपोज करते हैं तो प्राप्तकर्ता का ईमेल एड्रेस दर्ज करने वाले बॉक्स के पास एक और बॉक्स होता है जिस पर Cc लिखा होता है। इसका अर्थ होता है उस व्यक्ति का ईमेल एड्रेस दर्ज करें जिसे प्रतिलिपि भेजनी है। इसके नीचे एक और विकल्प (Bcc) होता है। सवाल यह है कि जीमेल में Bcc का विकल्प क्यों उपलब्ध कराया गया। इसकी उपयोगिता क्या है। आइए जानते हैं:-

सरदार पटेल यूनिवर्सिटी से B.sc science & Environmental श्री नीलेश भानुशाली बताते हैं कि:-
Cc का मतलब होता है कार्बन कॉपी और
Bcc का मतलब होता है ब्लाइंड कार्बन कॉपी
अगर आप Cc वाली कॉलम में कोई ईमेल एड्रेस लिखते हो तो ईमेल प्राप्तकर्ता को आधिकारिक रूप से यह जानकारी मिलेगी की उसे प्राप्त हुए ई-मेल की प्रतिलिपि किस किसको भेजी गई है।
लेकिन यदि आप Bcc वाली कॉलम में कोई ईमेल एड्रेस दर्ज करते हैं तो उस व्यक्ति को आपका ईमेल गोपनीय रूप से पहुंचेगा। यानी ई-मेल प्राप्तकर्ता को इस बात का पता नहीं चलेगा कि आपने जो ईमेल उसे भेजा है, उस की प्रतिलिपि किसी और को भी भेजी है। 

क्या ईमेल में Bcc का विकल्प गैरकानूनी नहीं है 

अब प्रश्न उपस्थित होता है कि क्या ई-मेल में Bcc का विकल्प गैरकानूनी नहीं है। यदि प्राप्तकर्ता को यह पता नहीं चलता कि उसे प्राप्त हुई जानकारी उसके अलावा किसी और को भी प्राप्त हुई है तो एक प्रकार से यह गलत है। कुछ मामलों में इसे गोपनीयता का उल्लंघन भी कह सकते हैं। परंतु यह गैरकानूनी नहीं है। 
ईमेल सेवाएं ऑफिशियल उपयोग के लिए बनाई गई है। विभागीय कार्रवाई के दौरान कई बार वरिष्ठ अधिकारी जांच पड़ताल के लिए यह व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं कि उनके अधीनस्थ अधिकारी आपस में जो व्यवहार कर रहे हैं, उसकी जानकारी उन्हें भी प्राप्त होती रहे। क्योंकि ई-मेल में ऑफिशियल कन्वर्सेशन होता है, और उसे अपने सीनियर से गोपनीय रखने की जरूरत नहीं है इसलिए Bcc गैरकानूनी नहीं है बल्कि व्यवस्था पर नजर रखने का एक तरीका है। ठीक वैसे ही जैसे ऑफिस में CCTV कैमरा होता है। जो आपकी प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं करता। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article
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