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लॉ, मेडिकल और मैनेजमेंट स्टूडेंट्स के जनरल प्रमोशन में अड़ंगा / MP NEWS

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी कॉलेज स्टूडेंट्स को जनरल प्रमोशन की घोषणा तो कर दी परंतु लॉ, मेडिकल और मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स का जनरल प्रमोशन अटक गया है। इंदौर की देवी अहिल्या बाई यूनिवर्सिटी ने मामले को बोर्ड ऑफ स्टडी के सामने ले जाने का फैसला किया है। स्वभाविक है शेष सभी यूनिवर्सिटी भी ऐसा ही कुछ करेंगे।

सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कोरोनाकाल को देखते हुए जनरल प्रमोशन को मंजूरी दी है। प्रदेशभर के विश्वविद्यालय ने भी सहमति दी है। अब गाइड लाइन का इंतजार किया जा रहा है।अधिकारियों के मुताबिक जनरल प्रमोशन देना तय है। मगर इसके लिए क्या नियम होंगे, इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है। उन्होंने कहा कि बीए-बीकॉम और बीएससी फाइनल ईयर के अधिकांश पेपर हो गए हैं। 

ऐसी स्थिति में फर्स्ट-सेकंड ईयर व इंटरनल के किन नंबरों को मान्य किया जाएगा, इसके बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है। गाइड लाइन आने के बाद ही रिजल्ट की प्रक्रिया शुरू होगी। संभवतः अगले तीन-चार दिन में विभाग नियम जारी कर सकता है। फिलहाल यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर और एमए-एमकॉम व एमएससी दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा शुरू नहीं हुई है।

डी-बैच का देना है रिजल्ट

परंपरागत कोर्स के अलावा विश्वविद्यालय को बीएएलएलबी-बीबीएएलएलबी, एलएलबी, एलएलएम और मेडिकल कोर्स एमबीबीए, बीडीएस और बीएससी नर्सिंग की डी-बैच के रिजल्ट जारी करना है। मगर इन कोर्स में जनरल प्रमोशन के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) की ओर से निर्देश आना बाकी है। अब दोनों संकाय के बोर्ड ऑफ स्टडी के सामने विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन देने के मुद्दे पर चर्चा होगी। 

अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों व्यावसायिक कोर्स हैं, जिनमें जनरल प्रमोशन के लिए आधार के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। वैसे बीसीआइ ने लॉ कोर्स के अंतिम वर्ष की ऑनलाइन परीक्षा का सुझाव दिया था। वहीं एमसीआइ की तरफ से कोई निर्देश अभी नहीं मिले हैं।

विश्वविद्यालय की उलझन

- परीक्षाओं पर फैसला होने के बावजूद विश्वविद्यालय की उलझनें कम नहीं हुई हैं, क्योंकि जनरल प्रमोशन के लिए पिछली परीक्षाओं के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर नंबर देना हैं। मगर प्राप्तांक अंक या फिर इंटरनल-असाइनमेंट-प्रोजेक्ट के नंबर का आकलन करना है। इसे लेकर नियम बनना है।
- फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को पिछली किन परीक्षाओं के आधार पर पास करना है, इसे लेकर भी स्थिति अभी साफ नहीं है।
- कोर्स में प्रत्येक वर्ष में अलग-अलग विषय रहते हैं, ऐसे में पिछली परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर नए विषयों का आकलन कैसे संभव है।
- मुख्य परीक्षा रिजल्ट या इंटरनल-प्रोजेक्ट के नंबर दोनों का आकलन कर जनरल प्रमोशन देना है। फिर दोनों में से किसी एक के नंबर को मान्य करना है।


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