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कोरोना के कारण अन्तरिक्ष अभियान भी विलम्बित | EDITORIAL by Rakesh Dubey

नई दिल्ली। धरती पर आती नित नई आपदा से मुक्ति के लिए मनुष्य ने अन्तरिक्ष की ओर रुख किया अन्तरिक्ष में उसकी आवाजाही तो चल ही रही थी और है। मनुष्य के मस्तिष्क में वहां बस्ती बसाने की कल्पना भी उभरने लगी। उसके सपनों को कोई तोड़ नहीं सकता पर उसके साकार होने में रोड़े जरुर अटका सकता है। जैसा अभी कोविड-19 कर रहा है। नावेल कोरोना वायरस के उत्पात के कारण नासा के दो अहम परीक्षण केंद्र बंद कर दिए गये हैं। नासा के अधिकतर अधिकारी और उससे जुड़े अन्य प्रदायक घर से काम कर रहे हैं। जरा सोचिये, अन्तरिक्ष मिशन और घर से काम कोई साम्य है? जो भी यह निश्चित है “प्रोजेक्ट आर्टेमिस” जो नासा का एक महत्वपूर्ण मिशन है कोरोना के कारण विलम्बित होगा।

“प्रोजेक्ट आर्टेमिस” के अंतर्गत 2024 अर्थात 4 साल में मानव अन्वेषण टीम को चांद पर भेजा जाना लक्ष्य है। इसके बाद चांद की कक्षा में एक स्थायी अंतरिक्ष मिशन स्थापित किया जाएगा जिसमें वैज्ञानिक रहेंगे। मंगल पर भी मानव मिशन भेजने की योजना है। कोरोनावायरस के कारण इन अभियानों में देरी होगी।वस्तुत: केन्द्रों में  डिजाइनों में विभिन्न स्रोतों से हासिल किए गए कलपुर्जों को जोड़ा जाता है और इन्हें कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।यह काम घर बैठे कैसे संभव है ?

पुख्ता खबर है कि न्यू ऑरलियंस के मिशू में काम रोक दिया गया है। चांद पर भेजे जाने वाले रॉकेट ऑरियन और अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली का डिजाइन यहाँ तैयार किया जा रहा है। इसी तरह मिसीसिपी में स्टेनिस स्पेस सेंटर को भी बंद कर दिए जाने की खबर है।इस मिशन का एक सीधा  सा उद्देश्य है। जिसके अंतर्गत नासा पहली महिला और अगले पुरुष को चांद की धरती पर भेजेगा जिससे नई प्रौद्योगिकी के जरिये चांद के रहस्यों की पड़ताल की जा सके।

“प्रोजेक्ट आर्टेमिस” के अंतर्गत आर्टेमिस-1, आर्टेमिस-, और आर्टेमिस-3 का प्रक्षेपण होगा। इसके लिए समयसारिणी तैयार की गई है। पहला मानवरहित ऑरियन रॉकेट अप्रैल 2021 में छोड़ा जाना तय किया गया है, जो कई उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करेगा। अब लगता है आर्टेमिस-1 के प्रक्षेपण में देरी होगी, इस कारण अक्टूबर 2021 में आर्टेमिस-7 का  लैंडर का प्रदर्शन भी आगे बढ़ सकता है ।इस लैंडर को फाल्कन-9 रॉकेट के माध्यम से चांद पर पहुंचाया जाना  तय किया है। इस रॉकेट का डिजाइन स्पेसएक्स ने तैयार किया है। रॉकेट विकास का काम भी समय से पीछे चल रहा है। इससे  लैंडर में भी देरी होगी।

इसी तरह लूनर गेटवे स्पेस स्टेशन एक अन्य महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। गेटवे चांद की कक्षा में एक छोटा अंतरिक्ष यान है जिसमें रहने के लिए कमरे, शोध के लिए प्रयोगशाला, अंतरिक्ष यानों के ठहरने के लिए स्थान आदि होंगे। नासा ने मूल रूप से तीन चरणों वाले एक लैंडर बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसमें अंतरिक्ष में जाने, वहां से आने और वैज्ञानिकों की अदला-बदली के लिए मॉड्यूल होंगे। ये सभी मॉड्यूल गेटवे में जोड़े जाएंगे। लेकिन अब वह अंतरिक्ष में जाने और वहां से आने वाले यान की स्थापित अवधारणा पर काम कर रहा है और इससे प्रोजेक्ट लूनर गेटवे में देरी होगी।

भारत ने चंद्रयान-3 की योजना बनाई है जिससे एक बार फिर चांद की सतह पर मानवरहित यान उतारने की कोशिश की जाएगी। चीन भी  कुछ रोबोटिक मिशनों पर काम कर रहा है और उसके बाद वह 2030 के दशक में मानव मिशन चांद पर भेजना चाहता है। जापान और रूस ने भी चांद पर मानव मिशन भेजने की योजना बनाई है। हालांकि दोनों देशों ने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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