मप्र सत्ता संग्राम: कुछ अनसुलझे सवाल, जो सब की पोल खोल रहे हैं | MP NEWS
       
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मप्र सत्ता संग्राम: कुछ अनसुलझे सवाल, जो सब की पोल खोल रहे हैं | MP NEWS

भोपाल। होली के दिन से शुरू हुआ मध्य प्रदेश का सत्ता संग्राम लगातार जारी है। राजनीति की रेस में दौड़ रहे नेता अब कुछ और ही करते नजर आ रहे हैं। कौन क्या बोल रहा है और क्या कर रहा है, क्यों बोल रहा है और क्या करना चाहता है, सब कंफ्यूजन हो गया है। अब तक की घटनाओं और बयानों से कुछ सवाल जन्म लेते हैं, जिनके जवाब जनता तक पहुंचना जरूरी है: 

मुख्यमंत्री कमलनाथ कहते हैं कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है। सरकार के पास बहुमत है। चिंता की कोई बात नहीं है। यदि चिंता की कोई बात नहीं है तो फिर फ्लोर टेस्ट क्यों नहीं कराते। 

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा दावा करते हैं कि सरकार बहुमत खो चुकी है। यदि ऐसा है तो भाजपा ने सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश क्यों नहीं किया। बार-बार राज्यपाल के पास क्यों जा रहे हैं। 

कमलनाथ कहते हैं कि हमारी सरकार सुरक्षित है। यदि किसी को संदेह है तो वह अविश्वास प्रस्ताव ले आए लेकिन बड़ी चतुराई से यह बात छुपा जाते हैं कि यदि भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव लाया तो क्या सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ऐसे सवालों को काल्पनिक बताते हैं लेकिन उनकी गतिविधियां साबित करती है कि वह मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई कर रहे हैं। निष्पक्ष नहीं है।

विधानसभा अध्यक्ष श्री एनपी प्रजापति के पास कुल 22 विधायकों के इस्तीफे आए थे। सभी इस्तीफे एक ही तरीके से भेजे गए थे। स्पीकर महोदय ने 6 विधायकों के त्यागपत्र स्वीकार कर लिए जबकि शेष विधायकों को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया। स्पीकर महोदय ने यह पक्षपात क्यों किया। 

विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को सामने आकर इस्तीफा देने के लिए कहा था। दो बार नोटिस जारी किया। विधायक नहीं आए। विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे खारिज कर देने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष को विधायक के त्यागपत्र पर 7 दिवस के भीतर फैसला करना चाहिए। क्या कारण है कि विधायकों के इस्तीफे की फाइल अपनी कार में रखकर घूम रहे हैं। 

16 मार्च को विधानसभा का सत्र स्थगित कर दिया गया। विधानसभा की वोटिंग मशीन खराब है। उन्हें रिपेयर क्यों नहीं कराया जा रहा। क्या विधान सभा सचिवालय नहीं चाहता कि वह तकनीकी रूप से 100% फिट रहे। या फिर विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों पर कोई दबाव है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ कहते हैं कि उनके 16 विधायकों को बेंगलुरु में बंधक बनाकर रखा गया है। सवाल यह है कि यदि बंधक बनाकर रखा है तो फिर अब तक FIR दर्ज क्यों नहीं की गई। मामला 16 विधायकों का है। सरकार को गंभीर होना चाहिए। केवल बयान देने से कोई मुक्त नहीं हो जाता। मुख्यमंत्री विधायकों को मुक्त कराने के लिए पुलिस क्यों नहीं भेज रहे। 

बेंगलुरु में विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि उन्होंने स्वेच्छा से बिना किसी भय और दबाव के इस्तीफा दिया है। सवाल है कि जब कोई और दबाव है ही नहीं, तो फिर बेंगलुरु में क्यों रुके हैं। वापस अपने घर क्यों नहीं आ जाते।

विधायकों ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार से खतरा है। यदि ऐसा है तो फिर उन्होंने अब तक मध्य प्रदेश राज्य सरकार के खिलाफ केंद्र सरकार से शरण एवं सुरक्षा क्यों नहीं मांगी। क्यों अब तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सुरक्षा के लिए कोई याचिका फाइल नहीं की। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ नहीं कहते, लेकिन उनके अघोषित प्रवक्ता दावा करते हैं कि बेंगलुरु में ठहरे हुए सभी विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हैं। यदि सभी विधायक सिंधिया के साथ हैं और इस्तीफा सच में दे चुके हैं तो फिर अब तक उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन क्यों नहीं की। यदि वह भाजपा ज्वाइन कर लेते हैं तो सारी लड़ाई खत्म हो जाएगी।