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कमजोर विद्यार्थी की योग्यता पर तंज कसा तो शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई होगी | MP NEWS

भोपाल। स्कूलों में शिक्षक अपने स्टूडेंट से गुस्से में आकर कई बार कुछ ऐसे शब्द कह जाते हैं जो स्टूडेंट के लिए अपमानजनक होते हैं। दरअसल यह एक ट्रिक होती है ताकि बच्चा अगली बार क्लास में इस तरह अपमानित होने से बचने के लिए पढ़ाई करे परंतु अब शिक्षक ऐसा कुछ भी नहीं कर पाएंगे। स्कूल में टीचर अब किसी भी स्टूडेंट्स के लिए गधा, मूर्ख, फिसड्डी और नालायक जैसे शब्दों का प्रयोग किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है क्योंकि मध्य प्रदेश के बाल आयोग के अनुसार इस तरह के शब्दों का उपयोग करना विद्यार्थी को प्रताड़ित करना माना जाएगा।

बच्चों को तनाव से बचाने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मप्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने काउंसलर्स की मदद से स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम तैयार किया है। इसमें प्रिंसिपल, टीचर और ब्लाक अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यशाला रीजनल इंस्टीट्यूट में तीन फरवरी को आयोजित की जा रही है। मास्टर ट्रेनर को तैयार करने के बाद आयोग प्रदेश के सभी स्कूलों की मॉनीटरिंग संकुल प्राचार्यों की मदद से करेगा।

दूसरे छात्र के साथ तुलना भी नहीं कर सकते

बाल आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान ने बताया कि टीचर के लिए जो बातें छोटी या सामान्य होती है वे बच्चों के लिए बड़ी होती हैं। जब बच्चों से पूछो कि उन्हें सबसे ज्यादा बुरा कब लगता है तो उनका उत्तर होता है कि जब टीचर सबके सामने डांटतीं हैं। खासतौर पर माता-पिता के सामने गधा, मूर्ख, फिसड्डी या नालायक कहते हैं। दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं। कई बच्चों ने तो यहां तक कहा कि उनका मन आत्महत्या तक करने का करता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई शिक्षक, छात्रो से इस तरह की भाषा का उपयोग करता है तो जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।