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ना नियमितीकरण किया, ना बाहर किये अतिथिविद्वानों को नौकरी दी | ATITHI VIDWAN NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग अपने सरकारी कालेजों में कार्यरत अतिथिविद्वान समुदाय के समूल नाश करने पर तुला हुआ है। हाल यह है कि नई सरकार के गठन में अपना अमूल्य योगदान देने वाले अतिथिविद्वान नई सरकार से वचनपत्र अनुसार नियमितीकरण की आशा लगाए बैठे थे, किन्तु नई सरकार के गठन के सवा साल का वक़्त बीत जाने के बावजूद सरकार ने न तो नियमितीकरण का वादा पूरा किय, उल्टे लगभग 2700 अतिथिविद्वानों को नौकरी से बेदखल कर बेरोजगार कर दिया। 

विभागीय मंत्री जीतू पटवारी लगातार भ्रामक बयान देकर मीडिया की सुर्खी बटोरने में लगे हुए हैं कि कोई अतिथिविद्वान बाहर नही होगा, सबको वापस नौकरी पर रखा जाएगा। जबकि वास्तविकता यह है कि 2700 लोगों को नौकरी से फाल आउट करने के बाद लगभग 690 लोगों को ही वापस अतिथिविद्वान व्यवस्था में वापस लिया जा सका है। जबकि लगभग 2000 के आसपास लोग अब भी व्यवस्था से बाहर हैं। उनकी रोज़ी रोटी का कोई ठिकाना नही है। 

मंत्री पटवारी लगातार बयान दे रहे हैं कि नए पदों का सृजन किया जाकर बाहर हुए अतिथिविद्वानों को पुनः नौकरी पर रखा जाएगा जबकि विभागीय अधिकारी सरकारी आदेश निकालकर नए पदों के सृजन में असमर्थता बता रहे हैं। इस भ्रामक बयानों और सरकारी आदेशों से हैरान परेशान अतिथिविद्वान समझ नही पा रहा हैं कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ। अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह के अनुसार सरकार ने अतिथिविद्वानों के साथ विश्वासघात किया है। हमने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की बात पर विश्वास करके मध्यप्रदेश में 15 वर्षों के बाद कांग्रेस की वापसी करवाई थी। किन्तु हमें अब तक निराशा ही हाथ लगी है।

80 दिनों से लगातार जारी है आंदोलन

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ सुरजीत भदौरिया ने कहा है कि शाहजाहानी पार्क भोपाल के हमारे आंदोलन ने 80 दिन पूर्ण कर लिए हैं। इस बीच हमारे कई साथी नियमितीकरण के संघर्ष में अपने जीवन की लड़ाई हार गए। अतिथिविद्वानों के साथ साथ उनके परिजन तक सरकार की बेरुखी का शिकार बने किंतु सरकार का रुख और नियत अभी भी साफ नही दिखाई पड़ रही है। हमने कांग्रेस पार्टी का प्रदेश में पुनर्वास करवा दिया किन्तु हमारे पुनर्वास का वादा करने के बाद भी कांग्रेस  पार्टी और मुख्यमंत्री कमलनाथ हमें भूल गए हैं। 

यहां तक कि उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथिविद्वानों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर उनके मानदेय को कम करने, कोई भी अवकाश सुविधा न देने एवं अनावश्यक व भ्रामक आरोप लगाकर अतिथिविद्वानों को सेवा से बाहर करने तक का दबाव बनाने का काम किया है।


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