मप्र की नई शराब नीति: सिर्फ करोड़पति कारोबारियों को मिलेगा शराब का ठेका | MP NEWS
       
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मप्र की नई शराब नीति: सिर्फ करोड़पति कारोबारियों को मिलेगा शराब का ठेका | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश में एक बार फिर नई शराब नीति बनाई जा रही है। अभी तक शराब की दुकानों का ठेका अलग-अलग ठेकेदारों को दिया जाता था परंतु आप पूरे जिले या एक साथ कई जिलों का ठेका एक ही शराब कारोबारी को दे दिया जाएगा। याद दिला दें कि 15 साल पहले दिग्विजय सिंह शासनकाल में भी ऐसा ही होता था। तब प्रदेश में शराब माफिया पनप गया था, वह अपनी शराब का उत्पादन करने लगा था सरकारी शराब की बिक्री कम हो गई थी। इसलिए व्यवस्था को बदला गया था।

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल गुप्ता की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के बड़े शराब कारोबारी और सरकार के बीच बातचीत हो चुकी है। आने वाले दिनों में जब शराब के ठेकों की नीलामी होगी तो वह दुकान के हिसाब से नहीं बल्कि जिलों के हिसाब से होगी। ठेका सिंडिकेट को दिया जाएगा। इतना ही नहीं, एक साल का लाइसेंस देने और अगले साल टेंडर करने की व्यवस्था को भी बदलकर दो साल का लाइसेंस दिया जा सकता है।

आबकारी विभाग के आला अधिकारियों के साथ शराब कारोबारियों की चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि कारोबारियों की मंशा के अनुरूप इस तरह के बदलाव की तैयारी है। 16 साल पहले दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते  शराब का कारोबार समूहों के ही हाथ में था। इसके बाद भाजपा के सत्ता में आने पर यह नीति बदल दी गई थी।

9 कारोबारियों के हाथ में था पूरे प्रदेश में शराब की सप्लाई का काम

दिग्विजय सरकार के समय मप्र में नौ लोगों के हाथों में ही शराब का काम था। फिर भाजपा शासन में आबकारी आयुक्त रहे ओपी रावत ने नीति बदली और  3000 शराब दुकानों की नीलामी की गई। इसके बाद दिग्विजय सरकार में सक्रिय रहे नौ लोगों के पास सिर्फ 5 से 7% ही दुकानें बची थीं। इससे 2003-04 तक 750 करोड़ तक का सालाना रेवेन्यू सीधे 200 करोड़ रु. बढ़ गया। 2019-20 में 11 हजार 500 करोड़ हो गया। 

अब : एक अप्रैल से नए सिरे से नीलामी  

अब राज्य सरकार पुरानी व्यवस्था में जाने वाली है। एक अप्रैल से पहले शराब दुकानों की नए सिरे से नीलामी प्रस्तावित है। इसलिए प्रयास किया जा रहा है कि नीति में जल्द से जल्द बदलाव कर दिया जाए।

अभी : प्रदेश में 1242 शराब कारोबारी

इनमें से 700 के पास शराब की दुकानें हैं। पांच सौ एेसे ठेकेदार हैं, जिनके पास दो दुकानें हैं। नीति बदली तो यह संख्या 50 से 100 के बीच रह जाएगी। अगले वर्ष के लिए 20% लाइसेंस फीस बढ़ाकर नवीनीकरण हो रहा है।

दस साल में एक बार ही हुई दुकानों की नीलामी

लंबे समय से शराब कारोबारियों का लाइसेंस नवीनीकरण ही किया जाता रहा। दस साल में आखिरी बार नीलामी 2015-16 में हुई। अब वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए नीलामी प्रस्तावित है। आबकारी विभाग काे उम्मीद है कि इससे राजस्व बढ़ जाएगा। वर्ष 2018-19 में करीब 9000 करोड़ रेवेन्यू था, जिसे 2019-20 में बढ़ाकर 11500 करोड़ रुपए कर दिया गया। अब इस लक्ष्य से भी आगे बढ़ना है।