मोदी कैबिनेट में NRC नहीं NPR मंजूर हुआ है, पढ़िए दोनों में क्या अंतर है
       
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मोदी कैबिनेट में NRC नहीं NPR मंजूर हुआ है, पढ़िए दोनों में क्या अंतर है

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट बैठक में NPR को मंजूरी दे दी गई। इसका विचार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय आया था। कुछ लोग एनपीआर को एनआरसी मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक बार फिर अफवाहों का दौर शुरू हो रहा है। यह बताना जरूरी है कि एनपीआर और एनआरसी में अंतर है। यह दोनों एक दूसरे से बेहद भिन्न है। 

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में क्या होगा

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के अपडेट को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। ऐसा बताया जा रहा है कि मोदी कैबिनेट (Cabinet Meeting) की मीटिंग NPR यानी नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के अपडेट पर मुहर लग चुकी है। कैबिनेट ने एनपीआर के लिए 8500 करोड़ रुपये मंजूर किए है। एनपीआर हर राज्य और हर केंद्र शासित प्रदेश में लागू होगा। पॉपुलेशन रजिस्टर का मकसद देश के नागरिकों की व्यापक पहचान का डेटाबेस तैयार करना है। इसमें लोगों की संख्या गिनने के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी। 

कैबिनेट मीटिंग के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, 'भारत मे अभी ब्रिटिश जमाने के हिसाब से जनगणना होती है। इसमें सभी लोगों की गिनती मुद्दा होता है। इस बार अप्रैल - सितंबर 2020 तक लाखों लोगों के घर-घर जाकर 2021 तक तकनीक की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर पूरी प्रक्रिया को आसान किया जाएगा। ऐप तैयार किया गया है। ऐप पर दी गई जानकारी में कोई भी प्रूफ या कागज़ देने या किसी बायोमेट्रिक की ज़रूरत नहीं होगी। सरकार ने कहा कि जनता पर है भरोसा, इसलिए किसी कागज़ या प्रूफ देने की ज़रुरत नहीं होगी।'

पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने एनपीआर विरोध कर रही है। बता दें कि 2010 में मनमोहन सिंह सरकार में NPR बनाने की पहल शुरू हुई थी। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी पर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को एक बार फिर से धरातल पर उतारने में जुटी है। हालांकि यह एनआरसी से पूरी तरह अलग है। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर(एनपीआर) के तहत एक अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है।

क्या है एनपीआर?

एनपीआर का पूरा नाम नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है। देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू हुई थी। तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। 

NPR और NRC में क्या अंतर है 

एनपीआर यानी नेशनल पापुलेशन रजिस्टर। सरल शब्दों में कहे तो भारत की जनगणना। यह पहले सादा  रजिस्टर पर होती थी, इस बार बायोमेट्रिक होगी। फायदा यह होगा कि जनगणना के दौरान फर्जी नागरिकों की गणना नहीं हो पाएगी। एक मोबाइल ऐप के जरिए सभी नागरिकों का वेरिफिकेशन होगा। यानी जिन लोगों की मृत्यु हो गई है उनकी संख्या अपने आप घट जाएगी। जबकि एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन भारत की नागरिकता से संबंधित है। एनआरसी के जरिए यह पता लगाया जाता है कि भारत में रहने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं। इसके लिए नागरिकों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करनी होती है।