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झाबुआ में दूषित MDM में शिक्षक का निलंबन अन्यायपूर्ण व गलत, शिक्षकों में आक्रोश

भोपाल। देशभर के विद्यालयों में विगत कई वर्षों से MDM केंद्र व राज्य सरकारों की बड़े बजट की "साझा बाल कल्याणकारी महत्वाकांक्षी योजना" संचालित है। मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष श्री प्रमोद तिवारी व उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने संयुक्त प्रेस नोट में बताया कि MDM को लेकर अंतिम जवाबदेही शिक्षक पर थोपी जाती हैं। यह तो वही बात हुई कि "खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास फूटा दस रुपया।" 

MDM में स्वीकृत राशि व राशन सीधे स्व-सहायता को जारी किया जाता है, इसमें शिक्षकों का कहीं से कहीं सीधा जुड़ाव नहीं है। शिक्षकों की जवाबदेही उपस्थित बच्चों को अनुशासनात्मक तरीके से भोजन संपन्न कराने तक सीमित होनी चाहिए। ठीक इसके उलट हर बात के लिए अंतिम रूप से शिक्षकों के मत्थे दोष मड़कर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आसान शिकार बनाया जाता है। विगत 14/11/2019 को झाबुआ जिले की प्रा वि बागजी फलिया अड़मालिया में दूषित MDM वितरण से 34 बच्चें बीमार होने से पदस्थ सहायक अध्यापक श्री पेमा चावड़ा को जिला पंचायत सीईओ संदीप शर्मा ने निलंबित कर दिया है, ये कार्रवाई एकतरफा होकर अधिकारी द्वारा मात्र पदस्थ शिक्षक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई से प्रदेश भर के शिक्षकों में गहरी नाराजगी व आक्रोश व्याप्त हैं। 

इस पर पुनर्विचार कर शिक्षक की तात्काल बहाली के साथ तत्थ्यात्मक जांच कर पुख्ता कार्रवाई होनी चाहिए, मलाई मारने वाले सफेद हाथी बचकर निकल जाते है, बड़ी मछलियों पर कार्रवाई की दरकार है। यह कार्य गैर शैक्षणिक होकर शिक्षकीय दायित्वों से पृथक है। विडम्बना है कि "शिक्षकों का हस्तक्षेप" अधिकांश स्व-सहायता समूहों को नागवारा लगता है, ये स्थानीय स्तर से अपने प्रभाव का दुरूपयोग करते हुए, स्वेच्छाचारिता से शासन के दिशा-निर्देशों का खुलकर अलंग्घन तो करते ही है साथ ही स्वीकृत राशन की निर्धारित मात्रा कटौती व मेनू अनुसार MDM भी उपलब्ध नहीं करवाते है। 

शिक्षकों द्वारा शासन के दिशा-निर्देश के कड़ाई से पालन करवाने पर उल्टा अपमानित होना पड़ता हैं, फल स्वरूप मेनू के उलट वही पनीली दाल व रूखा भोजन अंतिम लाभार्थी बच्चों तक पहुंचता हैं, यही सच्चाई है। "मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ" ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय श्री कमलनाथ जी एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रभुराम चौधरी से मांग की है कि आठ किलोमीटर के दायरे में आने वाले विद्यालयों का एक समूह बनाकर स्थायी रूप से एक-एक "निरीक्षण कर्मचारी" नियुक्त कर जवाबदेही सुनिश्चित की जावे। इससे शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक भोजन मिलेगा व शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।