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विवेक तन्खा के कारण बिजली कंपनियों के हेडक्वार्टर की शिफ्टिंग टली | JABALPUR NEWS

जबलपुर। बिजली कंपनियों के मुख्यालय को जबलपुर से भोपाल ले जाने के IAS अफसरों के प्रयास पर पानी फिर गया। दरअसल, फ्रांसीसी कंपनी की सलाह पर बिजली कंपनियों का स्थापना व्यय कम करने का प्रयास किया जा रहा है, इसी सलाह पर मुख्यालय को राजधानी ले जाने के प्रयास चल रहे थे, पर राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा (Vivek Tankha) द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) से सख्त विरोध जताए जाने के बाद सरकार बिजली कंपनियों के मुख्यालय को जबलपुर में ही रखने पर सहमत हो गई है। 

बता दें कि जेनको, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण सहित तीन कंपनियों के मुख्यालय जबलपुर में हैं। कंपनियों का मुख्यालय बदले जाने का कर्मचारी संगठन भी विरोध कर रहे थे। कई सालों से बिजली का मुख्यालय जबलपुर के शक्तिभवन से संचालित हो रहा है। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल जब अस्तित्व में था, तब भी उसका मुख्यालय जबलपुर हुआ करता था। इन दिनों भी मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मप्र पावर जनरेशन कंपनी और मप्र पावर ट्रांशमिशन कंपनी का मुख्यालय जबलपुर में है। दरअसल, बिजली कंपनी के सीएमडी का मुख्यालय भी जबलपुर है, लेकिन आईएएस होने के कारण सभी अफसर भोपाल से ही काम करते हैं। 

अफसरों के साथ बातचीत से लेकर मीटिंग तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होती है। इन्हीं सब कारणों के चलते अफसर इस प्रयास में जुटे थे कि मुख्यालय को ही भोपाल स्थानांतरित करा लिया जाए। इसके लिए खर्च कम होने और राजस्व घाटे में कमी लाए जाने का हवाला दिया जा रहा था। राज्य सरकार ने फ्रांस की कंपनी इलेक्ट्रिसाइट डी फ्रांस (ईडीएफ) से विद्युत वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मदद मांगी है। विद्युत नेटवर्क की तकनीकी और गैर तकनीकी हानियों का अध्ययन कर उन्हें रोकने के उपाय बताने को कहा, इस कंपनी ने भी अपनी कार्ययोजना में सभी योजनाओं को एक कर एक जगह मुख्यालय बनाने की सिफारिश की है।

विवेक तन्खा, राज्यसभा सदस्य का बयान

मेरे संज्ञान में बिजली कंपनियों का मुख्यालय स्थानांतरित किए जाने का विषय आया था। मैंने मुख्यमंत्री कमलनाथ और ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह से इस फैसले पर सख्त विरोध जताया। इसके बाद सीएम ने बिजली कंपनियों का मुख्यालय जबलपुर में रखे जाने पर सहमति दे दी।