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अतिथि विद्वानों ने उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी की वादाखिलाफी के खिलाफ कांग्रेस के वचन पत्र को जलाया | DAMOH ATITHI SHIKSHAK

पथरिया। शासकीय महाविद्यालय पथरिया में कार्यरत 2 दर्जन से अधिक अतिथि विद्वानों का आक्रोश आज उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी के खिलाफ फूटा और उन्होंने कांग्रेस के वचन पत्र को जलाकर राख कर दिया। 12 अक्टूबर को भोपाल में अतिथि विद्वानों ने वचन पत्र निभाओ रैली आयोजित की थी जिसके तहत नीलम पार्क में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने अपने उद्बोधन में बार-बार यह कहा था कि कोई भी अतिथि विद्वान बाहर नहीं होगा और कांग्रेस का जो वचन पत्र है उसके बिंदु क्रमांक 17.2 2 का पूरी तरह पालन करेंगे।  

उन्होंने कहा था कि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया चल रही है इस दौरान उन्होंने यह भी कहा था की पीएससी से चयनित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति बाद में की जाएगी पहले आप अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण और आपकी नौकरी की सुरक्षा की जाएगी लेकिन पिछले दो-तीन दिन से लगातार चयनित सहायक सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति आदेश से अतिथि विद्वान प्रभावित हो रहे हैं और उनकी सेवाएं समाप्त की जा रही है। जिससे आक्रोशित अतिथि विद्वानों ने प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने का मन बना लिया है। इसी सिलसिले में आज सांकेतिक रूप से अतिथि विद्वानों ने कांग्रेस के वचन पत्र को जलाकर अपना विरोध प्रकट किया। 

उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी को होश में आकर काम करना चाहिए। शिवराज सरकार को हटाने में हम अतिथि विद्वानों ने जी-जान लगा दी और कांग्रेस पर भरोसा किया लेकिन सत्ता के मद में आकर जीतू पटवारी और कमलनाथ सरकार नौकरशाहो के दबाव और उनसे गुमराह होकर अतिथि विद्वानों की नौकरी छीनने का षडयंत्र कर रहे है। जबकी सरकार भी जानती है कि अतिथि विद्वानों की मेहनत मजदूरी से पिछले पच्चीस वर्षों से उच्च शिक्षा चल रही है। नौकरी जाने के अंदेशे से अतिथि विद्वान और उनके परिवारों पर घोर संकट छा गया है।  डां अनिल जैन ने कहा की जीतू पटवारी वचन पत्र का अध्यन कर ले जो वचन पत्र में नहीं है और जो शिवराज सरकार की कालीकरतूतों को उजागर करने वाली सहायक प्राध्यापक परीक्षा जिसकी जांच कराने कमलनाथ और कांग्रेस चुनाव पूर्व कमर कसे हुई थी की नियुक्ति आदेश जारी कर ट्वीट कर रहे है कि मैने वचन पत्र को निभाया जबकी इस प्रकार का कोई वचन वचन पत्र में है ही नहीं। 

मै जीतू पटवारी के उस बयान की निंदा करता हूँ जिसमें उन्होंने कहा कि चयनित लोग मुंडन कराके सरकार की छवि खराब कर रहे है जिसके कारण नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु की गयी जब नियम है कि चयन मात्र से नियुक्ति की पात्रता नहीं है और इसके लिये सरकार पर दबाब नहीं डाला जा सकता। जहां उनके दबाब को सरकार को आढे हांथों लेना चाहिये वहीं सरकार दबाब में काम कर रही है। पीएससी की जांच होना चाहिये। 

डां आभा अग्रवाल ने कहा कि सरकार को जिम्मेदारी से बयान और वादा करना चाहिये वादाखिलाफी से कितने परिवार बर्बाद हो जायेगे सरकार को अनुमान नहीं। इस अवसर पर डां सुरेन्द्र तिवारी डां मनोज मिश्रा डां सुरेन्द्र गर्ग डां नमीता जैन डां भानुप्रिया पटेल डां गायत्री गुप्ता डां शिल्पी कौशिक सोहिनी प्रजापति डां विद्यादेवी पटेल पूजा साहू नरेन्द्र विक्रम बौद्ध शक्ति साकेत अशोक पटेल नरेश कुशवाहा  सहित सभी अतिथि विद्वान उपस्थित थे।