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औबेदुल्लागंज के सरकारी कॉलेज के नाम पर राजनीति शुरू | BHOPAL NEWS

औबेदुल्लागंज। वर्तमान जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष सुभाष पटेल में नगर पंचायत द्वारा आयोजित स्वागत कार्यक्रम में शासकीय कॉलेज का नाम बदलने की बात कही। इनके इस बात से नगर के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। मामले को लेकर भाजपा, अखिल विद्यार्थी परिसर एवं जनभागीदारी समिति के पूर्व अध्यक्ष ने विरोध दर्ज कराया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों नगर पंचायत ने नगर में स्वागत समारोह का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में शासकीय वीर सावरकर कॉलेज के जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष सुभाष पटेल में सामुहिक रूप से कहा कि कॉलेज का नाम बदला जाएगा। इस बात को लेकर जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी, अखिल विद्यार्थी परिषद एवं पूर्व जनभागीदारी समिति अध्यक्ष रामकिशोर नंदवंशी ने जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष को नसीहत दे डाली।

भाजपा के पदाधिकारियों ने कहा कि कांग्रेसी नेता सत्ता के नशे में इतने चूर हो गए हैं कि क्या बोल रहे हैं स्वयं को ही नहीं पता है। वीर सावरकर जी एक बहुत बड़े क्रांतिकारी रहे। स्वतंत्रता दिलाने में उनका बड़ा योगदान रहा है। ऐसे महापुरुष का नाम हटाने की बात कहकर अपनी मानसिकता को उजागर कर रहे हैं।

जनभागीदारी समिति के पूर्व अध्यक्ष रामकिशोर नंदवंशी ने कहा कि मेरे द्वारा 15 वर्षों से वीर सावरकर कॉलेज में किसी न किसी पद पर रहकर छात्र और स्टाफ का सहयोग करता रहा हूं। इस महाविद्यालय का नाम वीर सावरकर रखने के लिए हमारे द्वारा 2004 में मंत्री रामपाल सिंह राजपूत के समक्ष सभी छात्रों ने मिलकर एक प्रस्ताव बनाया।

महाविद्यालय का नाम वीर सावरकर रखने की मांग की गई थी। लंबे समय के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सभी के सहयोग से कॉलेज का नाम वीर सावरकर रखा गया। महाविद्यालय का नाम बदलने की बात कहकर छात्रों एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के भावना के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की जा रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कृष्णगोपाल पाठक, प्रवक्ता भाजपा मध्यप्रदेश

जनभागीदारी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। इनका सौभाग्य है कि इस बार इसका अवसर इन्हें मिला है । अच्छा होगा कि इस अवसर का उपयोग कॉलेज और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए करें । नाम बदलने की परंपरा अगर प्रारंभ की जाएगी तो यह आगे चलकर किसी के लिए ठीक नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश में दो तिहाई बहुमत की सरकार 15 वर्ष तक रही। अगर हमारी भी यही मनोवृत्ति होती तो मध्यप्रदेश विधानसभा का नाम आज भी इंदिरा गांधी विधान भवन न होता।

रामकिशोर नंदवंशी, पूर्व अध्यक्ष जनभागीदारी समिति

हमारे द्वारा अध्यक्ष के प्रयास से वर्ष 2004 में मंत्री रामपाल सिंह के समक्ष छात्र संघ द्वारा कॉलेज का नाम वीर सावरकर रखने की मांग की गई थी। यह मांग लंबे समय बाद पूरी हो सकी थी। इसकी बात बदलने की बात कहकर जनभागीदारी अध्यक्ष ने सभी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है।

सुभाष पटेल, अध्यक्ष जनभागीदारी समिति

मैं इस नगर का बेटा होने के साथ इस कॉलेज में जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष सौभाग्य से बना हूं। मैं चाहता हूं कि कॉलेज का नाम नगर के स्वतंत्रता सेनानी या नगर की कोई प्राचीन स्थान के नाम पर रखने की बात कही थी।