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मध्य प्रदेश से 42 लाख हैक्टेयर सरकारी जमीन गायब, 20 लाख करोड़ का घोटाला!

भोपाल। 3000 करोड़ की ई-टेंडर घोटाले का खुलासा करने वाले आईएएस अफसर मनीष रस्तोगी ने अब एक नए घोटाले का खुलासा किया है। प्रमुख सचिव राजस्व विभाग मनीष रस्तोगी ने पाया है कि सरकारी रिकॉर्ड से 42 लाख हैक्टेयर जमीन गायब हो गई है। यह जमीन 1980 से 2000 के बीच सरकारी रिकॉर्ड से गायब हुई। हर साल थोड़ी-थोड़ी जमीन प्रदेश से गायब होती हुई। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के हर जिले में सरकारी रिकॉर्ड से जमीन गायब हुई है। सवाल यह है कि क्या यह किसी भूमाफिया के लिए किया गया बड़ा घोटाला है। या फिर पूरे प्रदेश में कलेक्टर ने अपने अपने स्तर पर अलग-अलग घोटाले किए।

भोपाल में 1980 से 2000 के बीच गायब हुई जमीन

पत्रकार श्री दीपक विश्वकर्मा की एक रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में 1980 में 2 लाख 70 हजार 771 हेक्टेयर सरकारी जमीन थी, जो वर्ष 2000 में घटकर 2 लाख 5 हजार 571 हेक्टेयर ही रह गई है। भोपाल में 65 हजार हेक्टेयर सरकारी जमीन का रिकॉर्ड गायब है। भोपाल कलेक्टर ने सभी तहसील और सर्किलों के अधिकारियों को पत्र लिखकर एक सप्ताह में जांच कर 1980 से लेकर अब तक का रिकॉर्ड खंगालने के आदेश जारी कर दिए हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो गायब हुई जमीन का रिकॉर्ड पता करने के लिए हर गांव की निजी जमीन, वन भूमि व सरकारी जमीन व निजी खातों की जमीनों के खसरे तलाशे जा रहे हैं। वहीं राजस्व रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हर साल सीएलआर को जाता है जिलों की जमीनों का चिठ्ठा

नियमों के अनुसार हर जिले के कलेक्टर और अधीक्षक भू-अभिलेख को हर साल शहर में कितनी सरकारी जमीन आवंटित की गई, कितनी जमीन निजी खसरों में दर्ज की गई, कितने को पट्टे बांटे गए, सिंचित जमीन कितनी है सहित अन्य जानकारियों का एक चिठ्ठा बनाकर आयुक्त भू-अभिलेख को रिपोर्ट भेजी जाती है। इसमें ही सही तरीके से जानकारी अपडेट की जाती तो इस बात का खुलासा पहले ही हो जाता।

यह उठ रहे हैं सवाल

- मौके पर जमीन निजी तो नहीं हो गई ?
- राजस्व रिकॉर्ड से जमीन किसने गायब की?
- इतने साल तक जमीन की जांच क्यों नहीं की गई, गड़बड़ी चलती रही लेकिन किसी को पता क्यों नहीं चला?
- राजस्व रिकॉर्ड से जमीन के गायब होने की मुख्य वजह क्या है?
- किसे लाभ पहुंचाने के लिए या किसे नुकसान पहुंचाने के लिए यह जमीन गायब की गई है?

कुछ गड़बड़ी है, इसलिए शुरू की जांच
1980 से 2000 के बीच वन विभाग और राजस्व विभाग की कुछ जमीनों को लेकर गड़बड़ियां हुई हैं, इसलिए यह जांच की जा रही है। जमीन तो मौके पर है, लेकिन किसके खाते में दर्ज है इसका पता लगाया जा रहा है।
मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव राजस्व