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भोपाल में सरकारी आवास आवंटन घोटाले की जांच करने 20 टीमें निकलेगी

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कर्मचारियों के नाम से आवंटित सरकारी आवासों के भौतिक सत्यापन की कार्रवाई शुरू की जा रही है। सरकार के पास पुख्ता सूचनाएं की आवास आवंटन में घोटाला हुआ है। इसकी जांच करने के लिए कलेक्टर कार्यालय से 20 टीमें निकलेगी जो घर-घर जाकर पता लगाएंगी कि कहीं कोई घोटाला तो नहीं।

तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आवासों का सत्यापन होगा

बताया जा रहा है कि गृह विभाग को यह शिकायतें मिली हैं कि कई अधिकारी आवास लेने के बाद भी उनमें नहीं रह रहे हैं और कुछ ने किराए पर दे रखे हैं। विभाग ने सर्वे के लिए जिला प्रशासन (कलेक्टर) से 20 टीमें मांगी हैं। सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग ने करीब डेढ़ साल पहले E और F टाइप मकानों में रहने वालों का सर्वे कराया गया था। इसमें जिसके नाम पर आवास आवंटित है और वो कब से रह रहे हैं, इसकी जानकारी जुटाई गई थी। इसमें यह बात भी सामने आई कि कईयों ने बरसों से तय किराया ही अदा नहीं किया है। इसके बाद गृह विभाग ने वसूली के नोटिस जारी किए और कुछ लोगों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई भी की। इसी बीच पुलिसकर्मियों सहित कुछ अन्य कर्मचारियों को पारी बाहर (क्रम से हटकर) आवास देने के मामले में मुख्यमंत्री के नाम की फर्जी नोटशीट का मामला सामने आया। जांच में गड़बड़ी प्रमाणित मिली तो लगभग 28 आवंटन आदेश निरस्त कर आवास खाली कराने के साथ फर्जीवाड़े की जांच जहांगीराबाद थाने को सौंपी गई है।

संपदा संचालनालय के कर्मचारियों ने किया है घोटाला

इस पूरे मामले में विभाग के लिपिक राहुल और संपदा संचालनालय के कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आई है। विभाग की ओर से विधानसभा में मकानों में रहने वालों का सर्वे कराने का आश्वासन भी दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भोपाल में लगभग 11 हजार सरकारी मकान हैं। G, H और I श्रेणी के मकानों का कभी भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया है। अब तय किया गया है कि जिला प्रशासन से बीस टीमें लेकर इस काम को अंजाम दिया जाएगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि आवासों की स्थिति क्या है। दरअसल, कुछ मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं, इसलिए आवंटित होने के बाद भी यह खाली पड़े हुए हैं। इनमें अवैध गतिविधियां चलने की शिकायतें भी पुलिस को मिलती रही हैं।

निजी लोगों को दिए गए सरकारी आवासों की समीक्षा अब तक नहीं

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकारी मकानों की कमी देखते हुए वर्ष 2003 से 2018 के बीच अशासकीय व्यक्तियों को दिए गए आवासों की समीक्षा करने कैबिनेट की सब-कमेटी बनाई थी, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी एक भी बैठक नहीं हुई। जबकि, एक माह में समिति को प्रतिवेदन सौंपना था। समिति में मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, बाला बच्चन, उमंग सिंघार, जयवर्धन सिंह और तरुण भनोत सदस्य हैं। सूत्रों का कहना है कि दो बार बैठक बुलाने की तैयारी भी हुई, लेकिन विभिन्न् कारणों से यह नहीं हो सकी। समिति को आवास आवंटन में नियमों का पालन हुआ या नहीं, यह देखना है। इसके साथ ही भविष्य में अशासकीय व्यक्तियों को आवास देने के मापदंड तय करने के साथ अन्य मुद्दों पर अपनी राय देनी है। समिति सदस्य गृहमंत्री बाला बच्चन जरूर विभागीय अधिकारियों से अशासकीय व्यक्तियों को दिए आवासों का फीडबैक ले चुके हैं।