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हनी ट्रैप: हाई कोर्ट ने सरकार को लताड़ लगाई, SIT चीफ बदला नहीं जाएगा | MP NEWS

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आज हनीट्रैप मामले में कमलनाथ सरकार को लताड़ लगाई। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अब एसआईटी चीफ को उसकी अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकता। बता दें कि हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है जिस पर सुनवाई हो रही थी। याचिका में निवेदन किया गया है कि सरकार एसआईटी में परिवर्तन करके मामले की जांच को प्रभावित कर रही है। 

गृह सचिव की रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी के चीफ (SIT Chief) को बार-बार बदले जाने पर गृह सचिव से इस बदलाव का कारण जानने के लिए बंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार ने ये रिपोर्ट पेश किया था लेकिन रिपोर्ट में अधूरी जानकारी और संतोषजनक तथ्य नहीं होने की वजह से हाइकोर्ट ने फटकार लगाई। 

एसआईटी को अब हाईकोर्ट का संरक्षण

हाईकोर्ट ने दिया कि अब उसकी अनुमति के बिना एसआईटी में शामिल किसी भी अधिकारी का तबादला नहीं किया जा सकता, ना ही एसआईटी की जांच से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अभी तक हनी ट्रैप मामले में जितने भी इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए गए हैं, उन्हें जांच के लिए हैदराबाद स्थित आईटी लैब में भेजा जाएगा। हाइकोर्ट ने एसआईटी अधिकारियों को 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।

जांच पर हाईकोर्ट की नज़र

समझा जा रहा है कि हाइकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब पूरी जांच कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होनी तय हुई है, एसआईटी को इन्वेस्टिगेशन स्टेटस रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही अब एसआईटी में कोई परिवर्तन नहीं किया जाये, एसआईटी में नियुक्त मौजूदा अधिकारियों का हाईकोर्ट की अनुमति के बिना तबादला नहीं किया जा सकेगा। 

वकील मनोहर दलाल ने लगाई थी PIL

बता दें कि हनी ट्रैप मामले का खुलासा होने के बाद इसकी जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया था लेकिन चंद दिनों में ही एसआईटी में कुछ ही दिनों मेें शीर्ष स्तर के अधिकारियों का तबादला हुआ था, इसी पर सीनियर वकील मनोहर दलाल ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने यह अपील की थी कि बार-बार एसआईटी चीफ बदलने से जांच प्रभावित हो सकती है। साथ ही हनी ट्रैप मामले की जांच हाईकोर्ट के देख-रेख में की जाए। इसी पर सुनवाई करते हुए पिछली तारीख पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया था।

मामला क्या है 

पिछले दिनों मध्य प्रदेश पुलिस ने पांच लड़कियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने यह दावा किया था कि यह लड़कियां मध्य प्रदेश के नेताओं और नौकरशाहों से अवैध शारीरिक संबंध बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करती हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि यह लड़कियां नेताओं और नौकरशाहों को हनीट्रैप का शिकार बनाकर सरकारी कामकाज में दखल देती है। इन्होंने कई कंपनियों को टेंडर दिलाए एवं कई संस्थाओं को काम भी दिलाया। अब यह मामला अवैध संबंधों से बढ़कर भ्रष्टाचार का हो गया है।